विधानसभा मॉनसून सत्र: RJD नेता बोले- बेटियां स्कूल छोड़ रहीं, सरकार को सिर्फ भगवा रंग की चिंता

Bihar Assembly Monsoon Session के दूसरे दिन विधानसभा परिसर में शिक्षा का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक बहस बनकर सामने आया। Bihar Assembly Monsoon Session के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठाए। इस बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता कुमार सर्वजीत ने मॉडल स्कूलों के रंग, नाम परिवर्तन और सरकारी स्कूलों की मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए। मंगलवार को विधानसभा पहुंचते ही विपक्षी विधायक हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखाई दिए। मीडिया से बातचीत में कुमार सर्वजीत ने दावा किया कि राज्य के हजारों स्कूलों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है और सरकार को पहले इन समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर RJD का सरकार पर हमला
आरजेडी नेता कुमार सर्वजीत ने कहा कि राज्य के कई सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए आवश्यक सुविधाएं अभी भी उपलब्ध नहीं हैं। उनका दावा था कि बड़ी संख्या में स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है, जिसका असर विशेष रूप से छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विद्यालयों की इमारतों के रंग और नाम बदलने पर अधिक ध्यान दे रही है, जबकि बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा मंत्री पर भी इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाए।
सरकार ने 551 मॉडल स्कूलों की शुरुआत की
दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में 551 मॉडल स्कूलों का उद्घाटन किया, जिन्हें 'सरस्वती विद्या निकेतन' नाम दिया गया है। सरकार के अनुसार इन विद्यालयों का उद्देश्य सरकारी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाना और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं, तकनीक आधारित शिक्षण और बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की योजना बनाई गई है।
प्राइवेट स्कूल जैसी सुविधाएं देने का दावा
मुख्यमंत्री ने उद्घाटन के दौरान कहा था कि सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी वही अवसर मिलें जो निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को प्राप्त होते हैं। सरकार के मुताबिक इन मॉडल स्कूलों में आधुनिक कक्षाएं, बेहतर शिक्षण संसाधन, तकनीकी सुविधाएं और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
करीब 4 लाख विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
सरकारी जानकारी के अनुसार 551 सरस्वती विद्या निकेतन में लगभग चार लाख विद्यार्थियों के अध्ययन की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन विद्यालयों से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और छात्रों के समग्र विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि ये केवल नए स्कूल नहीं हैं, बल्कि विकसित बिहार के लक्ष्य और नई शिक्षा नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं। इन संस्थानों में ज्ञान के साथ-साथ अनुशासन, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
विधानसभा में शिक्षा बना प्रमुख राजनीतिक मुद्दा
मॉनसून सत्र के दूसरे दिन शिक्षा का मुद्दा सत्ता और विपक्ष के बीच बहस का केंद्र बना रहा। विपक्ष ने सरकारी स्कूलों की मौजूदा स्थिति, शौचालय, छात्राओं की पढ़ाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार को घेरा। वहीं सरकार का कहना है कि मॉडल स्कूल परियोजना सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
आगे क्या?
मॉनसून सत्र के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच चर्चा जारी रहने की संभावना है। मॉडल स्कूलों को लेकर उठे सवालों और सरकार के दावों पर विधानसभा में आगे भी बहस हो सकती है। फिलहाल एक ओर विपक्ष बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार नई शिक्षा व्यवस्था और आधुनिक स्कूलों को राज्य के भविष्य के लिए आवश्यक बता रही है।