बांकीपुर उपचुनाव: अशोक चौधरी बोले- NDA की टक्कर सिर्फ RJD से, PK पर साधा निशाना

बांकीपुर उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। बांकीपुर उपचुनाव के लिए प्रमुख दलों ने अपने-अपने दावे मजबूत करने शुरू कर दिए हैं। गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने एनडीए की जीत का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में एनडीए की सीधी टक्कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से है, जबकि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर सिर्फ वोटों का बंटवारा करने के लिए मैदान में उतरे हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। बीजेपी और आरजेडी के उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं, जबकि प्रशांत किशोर 11 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। ऐसे में राजनीतिक दलों के बीच बयानों का दौर लगातार तेज होता जा रहा है।
NDA की लड़ाई सिर्फ RJD से, बोले अशोक चौधरी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि एनडीए किसी तीसरी पार्टी को अपनी मुख्य चुनौती नहीं मानता। उनके अनुसार, इस उपचुनाव में असली मुकाबला केवल आरजेडी और एनडीए के बीच है। उन्होंने दावा किया कि प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में प्रभावी चुनौती पेश नहीं कर पाएंगे। अशोक चौधरी ने कहा कि जन सुराज का उद्देश्य केवल वोटों का बंटवारा करना है और इसका असर परिणाम पर निर्णायक नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले हुए चुनावों की तरह इस बार भी जन सुराज को अपेक्षित समर्थन नहीं मिलेगा।
बीजेपी और RJD उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकन
गुरुवार को बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार ने बांकीपुर सीट से अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव में किसी बड़ी चुनौती की उम्मीद नहीं है और जनता एनडीए के विकास कार्यों पर भरोसा जताएगी। वहीं, आरजेडी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता ने भी नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्होंने दावा किया कि इस बार बांकीपुर सीट पर वर्षों पुराना राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। रेखा गुप्ता ने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और उन्हें विश्वास है कि मतदाता इस बार नया इतिहास लिखेंगे। उन्होंने लोगों से समर्थन और आशीर्वाद की अपील भी की।
11 जुलाई को नामांकन करेंगे प्रशांत किशोर
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर अभी तक नामांकन नहीं कर पाए हैं। पार्टी के अनुसार वह 11 जुलाई को बांकीपुर सीट से अपना नामांकन दाखिल करेंगे। प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से इस सीट पर मुकाबला पहले की तुलना में अधिक रोचक माना जा रहा है। हालांकि एनडीए लगातार यह दावा कर रहा है कि जन सुराज चुनावी परिणाम में निर्णायक भूमिका नहीं निभा पाएगा। दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तीसरे उम्मीदवार की मौजूदगी से वोटों का समीकरण प्रभावित हो सकता है। अंतिम तस्वीर मतदान के बाद ही साफ होगी।
क्या इस बार होगा त्रिकोणीय मुकाबला?
बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी, आरजेडी और जन सुराज की सक्रियता के कारण त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा तेज है। बीजेपी अपनी संगठनात्मक ताकत और सरकार के कामकाज के आधार पर जीत का दावा कर रही है। वहीं आरजेडी बदलाव की बात करते हुए चुनाव को अपने पक्ष में बताने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, जन सुराज की एंट्री ने चुनावी चर्चा को नई दिशा दी है। हालांकि विभिन्न दल अपने-अपने राजनीतिक आकलन के अनुसार इसकी भूमिका को अलग-अलग तरीके से पेश कर रहे हैं। मतदाताओं के लिए स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की छवि और चुनाव प्रचार आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए नामांकन के बाद अब सभी की नजर चुनाव प्रचार और जनसभाओं पर रहेगी।
बांकीपुर उपचुनाव क्यों है खास?
बांकीपुर विधानसभा सीट बिहार की चर्चित शहरी सीटों में गिनी जाती है। इस सीट पर होने वाला उपचुनाव केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की बदलती राजनीतिक रणनीतियों और दलों की ताकत के परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है। इसी वजह से प्रमुख दल लगातार चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों और जनसभाओं के जरिए माहौल बनाने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में प्रचार अभियान और राजनीतिक बयानबाजी के और तेज होने की संभावना है।