सावन 2026: बाबा गरीबनाथ में उमड़ी आस्था, जलाभिषेक के लिए भक्तों का सैलाब
Baba Garibnath Sawan 2026 की शुरुआत के साथ मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। Baba Garibnath Sawan 2026 के पहले दिन सुबह से ही श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते नजर आए। उत्तर बिहार के देवघर के नाम से प्रसिद्ध इस सिद्धपीठ में सावन भर लाखों कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
महामंडलेश्वर बाबा अमरनाथ ने बताया कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसी कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु लंबी दूरी तय कर यहां जलाभिषेक करने आते हैं।
उत्तर बिहार का देवघर क्यों कहलाता है बाबा गरीबनाथ मंदिर?
मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ मंदिर भगवान शिव का एक प्राचीन और प्रसिद्ध सिद्धपीठ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था, इसलिए इस मंदिर की विशेष आस्था है।
इसी वजह से इसे उत्तर बिहार का देवघर भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से यहां भगवान शिव की पूजा करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
हर वर्ष सावन के दौरान बिहार ही नहीं, बल्कि नेपाल और आसपास के कई राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
क्या है स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता?
मंदिर से जुड़ी प्राचीन मान्यता के अनुसार, जिस स्थान पर आज गर्भगृह स्थित है, वहां कभी घना जंगल हुआ करता था।
कहा जाता है कि वहां मौजूद एक विशाल पीपल के पेड़ को काटने के दौरान उसमें से रक्त जैसी धारा निकलने लगी। इसके बाद लोगों ने पेड़ की कटाई रोक दी।
बाद में उसी स्थान पर स्वयंभू शिवलिंग होने की जानकारी मिली। इसके बाद वहां पूजा-अर्चना शुरू हुई और समय के साथ यह स्थान प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र बन गया। आज भी मंदिर परिसर में वह प्राचीन पीपल का वृक्ष श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
पहलेजा घाट से जल लेकर पहुंचते हैं हजारों कांवड़िए
सावन के दौरान बाबा गरीबनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता कांवड़ यात्रा मानी जाती है।
श्रद्धालु सोनपुर के पहलेजा घाट से गंगा जल भरकर लगभग 50 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए हाजीपुर के रास्ते मुजफ्फरपुर पहुंचते हैं। इसके बाद बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
कई श्रद्धालु इससे भी अधिक दूरी तय कर बाबा के दरबार में पहुंचते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार यह यात्रा भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
देवघर की परंपरा से जुड़ी है गरीबनाथ धाम की आस्था
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस प्रकार झारखंड के देवघर में श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम और फिर बासुकीनाथ में जलाभिषेक करते हैं, उसी तरह उत्तर बिहार में पहलेजा घाट से जल लेकर पहले बाबा हरिहरनाथ और फिर बाबा गरीबनाथ के दर्शन करने की परंपरा भी प्रचलित है।
इसी कारण सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है और पूरा मंदिर परिसर 'बोल बम' के जयघोष से गूंज उठता है।
बिहार ही नहीं, नेपाल से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
बाबा गरीबनाथ मंदिर की प्रसिद्धि केवल मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं है।
सीतामढ़ी, वैशाली, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, समस्तीपुर सहित बिहार के कई जिलों के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा गरीबनाथ के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।
सावन में क्यों बढ़ जाता है बाबा गरीबनाथ का महत्व?
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
इसी वजह से बाबा गरीबनाथ मंदिर में हर सोमवार और पूरे सावन महीने के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी करता है ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
- 30 जुलाई 2026 से सावन की शुरुआत के साथ बाबा गरीबनाथ मंदिर में जलाभिषेक शुरू हुआ।
- मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ मंदिर उत्तर बिहार का देवघर कहलाता है।
- यहां का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है और इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है।
- श्रद्धालु पहलेजा घाट से गंगा जल लाकर लगभग 50 किलोमीटर की यात्रा के बाद जलाभिषेक करते हैं।
- बिहार के कई जिलों के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा गरीबनाथ के दर्शन करने पहुंचते हैं।
