राजनाथ सिंह के इस्तीफे की मांग क्यों उठी? ऑपरेशन सिंदूर पर बढ़ा सियासी विवाद

 


राजनाथ सिंह के इस्तीफे की मांग क्यों हो रही है? ऑपरेशन सिंदूर विवाद की पूरी कहानी

राजनाथ सिंह इस्तीफा की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। राजनाथ सिंह इस्तीफा का मुद्दा कांग्रेस द्वारा उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। विवाद का केंद्र संसद में रक्षा मंत्री के उस बयान को बनाया जा रहा है, जिसे कांग्रेस ने भ्रामक बताया है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया और सैन्य अभियान से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को तत्काल सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

यह पूरा विवाद वर्ष 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर और उसमें शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम राष्ट्रीय समर स्मारक पर दर्ज किए जाने के बाद तेज हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

कांग्रेस का आरोप है कि जुलाई 2025 में संसद के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी भारतीय सैनिक की शहादत नहीं हुई।

विपक्ष का कहना है कि बाद में राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) पर ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े छह शहीद सैन्यकर्मियों के नाम दर्ज किए गए। इसी आधार पर कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि सैनिक शहीद हुए थे तो संसद में अलग जानकारी क्यों दी गई।

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि रक्षा मंत्री के बयान का अर्थ गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

कांग्रेस ने क्या-क्या मांग की?

कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए।

पार्टी ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस्तीफा दें।
  • उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जाए।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व शहीदों के परिवारों तथा देश से माफी मांगें।

इसके अलावा कांग्रेस ने अग्निवीर योजना को समाप्त करने की अपनी पुरानी मांग भी दोहराई।

सरकार का पक्ष क्या है?

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के पुराने बयान के एक हिस्से को संदर्भ से हटाकर प्रसारित किया जा रहा है।

सरकार के अनुसार संसद में उस समय चर्चा भारतीय लड़ाकू विमानों और पायलटों को लेकर चल रही थी। मंत्री का आशय यह था कि मिशन के दौरान कोई भारतीय पायलट हताहत नहीं हुआ और कोई विमान दुश्मन के कब्जे में नहीं गया।

मंत्रालय का यह भी कहना है कि सैन्य अभियानों से जुड़ी कई जानकारियां राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण तुरंत सार्वजनिक नहीं की जातीं।

ऑपरेशन सिंदूर क्या था?

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी।

इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने मई 2025 में सीमा पार सैन्य कार्रवाई की, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया।

कार्रवाई के बाद तत्कालीन सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने प्रेस वार्ता में बताया था कि अभियान के दौरान कुछ जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। हालांकि सुरक्षा कारणों से उस समय उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए थे।

बाद में शहीदों का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ हुआ और संबंधित सैन्य अधिकारियों ने उनके परिजनों से भी मुलाकात की।

विवाद की जड़ क्या है?

पूरे विवाद का केंद्र संसद में दिया गया बयान और शहीदों के नाम सार्वजनिक होने के समय को लेकर है।

विपक्ष का कहना है कि यदि शहीदों का सम्मान पहले से किया गया था, तो संसद में पूरी जानकारी क्यों नहीं दी गई। वहीं सरकार का तर्क है कि सैन्य अभियानों से जुड़ी सूचनाओं को सार्वजनिक करने का समय और तरीका सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार तय किया जाता है।

यही कारण है कि अब यह बहस केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहकर पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन तक पहुंच गई है।

आगे क्या हो सकता है?

कांग्रेस संकेत दे चुकी है कि वह इस मुद्दे को संसद और अन्य सार्वजनिक मंचों पर उठाएगी।

वहीं भाजपा की ओर से इस्तीफे की मांग पर अभी कोई विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले संसद सत्र में इस विषय पर और चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

यदि सरकार या रक्षा मंत्री इस विषय पर नया बयान जारी करते हैं, तो विवाद की दिशा बदल सकती है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।

एक नजर में मुख्य बातें

  • ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस ने रक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।
  • विवाद संसद में दिए गए पुराने बयान को लेकर है।
  • राष्ट्रीय समर स्मारक पर छह शहीदों के नाम दर्ज होने के बाद बहस तेज हुई।
  • सरकार ने कहा कि बयान को संदर्भ से अलग प्रस्तुत किया गया।
  • कांग्रेस विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
  • मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता की बहस का विषय बन गया है।
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