
बिहार की राजनीति में इन दिनों राबड़ी देवी हीरे का कंगन विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। राबड़ी देवी हीरे का कंगन विवाद उस समय सामने आया जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद के जन्मदिन समारोह में भोजपुरी गायक छोटू छलिया को कथित तौर पर हीरे का कंगन उपहार में दिया। अब इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और जांच की मांग भी उठने लगी है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कंगन की कीमत, खरीद के स्रोत और भुगतान के तरीके को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
लालू प्रसाद के 79वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भोजपुरी गायक छोटू छलिया को एक कंगन उपहार में दिए जाने की चर्चा सामने आई। कार्यक्रम के बाद गायक की ओर से भी इस उपहार का जिक्र किया गया। इसके बाद कंगन की प्रकृति और कीमत को लेकर अलग-अलग दावे किए जाने लगे। इसी को आधार बनाते हुए जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह वास्तव में हीरे का कंगन है तो उसकी वास्तविक कीमत और खरीद से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
EOU को लिखे पत्र में क्या मांग की गई?
नीरज कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि जनहित और वित्तीय पारदर्शिता के मद्देनजर मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने संबंधित एजेंसियों से कंगन के मूल्य और उससे जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच करने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि कंगन की वास्तविक बाजार कीमत का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि इसकी खरीद किस माध्यम से की गई और भुगतान का स्रोत क्या था। उन्होंने यह भी मांग की है कि उपहार के हस्तांतरण की परिस्थितियों और स्वामित्व संबंधी तथ्यों की पुष्टि की जाए।
किन-किन पहलुओं की जांच की मांग?
जेडीयू एमएलसी ने अपने पत्र में कई बिंदुओं का उल्लेख किया है। इनमें प्रमुख रूप से वित्तीय और कानूनी पहलुओं की जांच की मांग शामिल है। उन्होंने कहा है कि आयकर अधिनियम के तहत आवश्यक खुलासों और संभावित टैक्स देनदारियों की भी जांच होनी चाहिए। इसके अलावा यदि आवश्यक हो तो बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जाए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी प्रकार के अवैध आय स्रोत या वित्तीय अनियमितता के संकेत मिलते हैं तो धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत भी जांच की जा सकती है। इसके साथ ही किसी भी संभावित अघोषित संपत्ति, कर चोरी या भ्रामक सार्वजनिक प्रस्तुतीकरण की जांच की मांग की गई है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
मामले के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष के नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि अभी तक जांच एजेंसियों की ओर से इस मामले में किसी औपचारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि EOU इस मांग पर क्या निर्णय लेती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है, खासकर तब जब इससे जुड़े नए तथ्य सामने आते हैं।
राबड़ी देवी और लालू परिवार पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
अपने पत्र में नीरज कुमार ने यह भी उल्लेख किया है कि भूमि के बदले नौकरी मामले में पहले से जांच और कानूनी प्रक्रिया चल चुकी है। उन्होंने इसी संदर्भ का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। हालांकि इस मामले में किसी नई जांच या आरोप को लेकर संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक विवाद में तथ्यों और आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी होता है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल पूरा मामला जांच की मांग तक सीमित है। EOU की ओर से यदि कोई प्रारंभिक समीक्षा या जांच शुरू की जाती है तो इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। राजनीतिक हलकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि संबंधित एजेंसियां इस मामले को किस तरह से देखती हैं और आगे क्या कदम उठाती हैं। तब तक यह विवाद बिहार की राजनीतिक चर्चा में बना रह सकता है।