राबड़ी देवी के बंगले पर बढ़ा सियासी संग्राम, मंत्री नंद किशोर राम बोले- दलित होना क्या मेरा दोष है?

 


पटना। राबड़ी देवी बंगला विवाद अब बिहार की राजनीति में नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। राबड़ी देवी बंगला विवाद के बीच बिहार सरकार के डेयरी, पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के बयान पर भावुक प्रतिक्रिया दी है। मंत्री ने कहा कि उन्हें सरकार द्वारा वैध रूप से आवास आवंटित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद आवास खाली नहीं किया जा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसका कारण उनका दलित समाज से होना है।

नंद किशोर राम के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी दलीलें सामने रख रहे हैं।

आवास आवंटन को लेकर क्या है पूरा मामला?

बिहार सरकार ने हाल ही में पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले का आवंटन मंत्री नंद किशोर राम के नाम किया है। यह वही आवास है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी लंबे समय से रह रही हैं।

सरकार का कहना है कि मंत्री को पहले कोई सरकारी आवास आवंटित नहीं था, इसलिए नियमों के तहत उन्हें यह बंगला दिया गया। दूसरी ओर राबड़ी देवी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह बंगला खाली नहीं करेंगी।

यही विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बन गया है।

मंत्री नंद किशोर राम ने क्या कहा?

मीडिया से बातचीत में नंद किशोर राम ने कहा कि वह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रामनगर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित प्रतिनिधि हैं और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें नियमों के अनुसार आवास आवंटित किया है। इसके बावजूद यदि बंगला खाली नहीं किया जा रहा है तो उन्हें लगता है कि इसका कारण उनका दलित समाज से होना हो सकता है।

मंत्री ने कहा कि यदि कोई दूसरा कारण होता तो सरकार के आदेश का पालन किया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उनका दलित होना ही इस विवाद की वजह बन रहा है।

राबड़ी देवी ने खाली करने से किया इनकार

इस पूरे विवाद के केंद्र में राबड़ी देवी का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह बंगला खाली नहीं करेंगी।

राबड़ी देवी ने सरकार को चुनौतीपूर्ण अंदाज में कहा कि यदि प्रशासन आवास खाली कराना चाहता है तो बल प्रयोग करके करा ले। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहे जो फैसला ले, वह स्वेच्छा से बंगला छोड़ने वाली नहीं हैं।

सरकार की ओर से उन्हें पहले भी कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार उन्हें 39 हार्डिंग रोड स्थित एक अन्य सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है।

रोहिणी आचार्या और जदयू की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा में

राबड़ी देवी की बेटी रोहिणी आचार्या ने भी इस मामले में खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यदि किसी में हिम्मत है तो बंगला खाली कराकर दिखाए।

वहीं जदयू नेता नीरज कुमार लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। उन्होंने सवाल किया है कि आखिर सरकार के नोटिस के बावजूद 10 सर्कुलर रोड का आवास खाली क्यों नहीं किया जा रहा।

उनकी ओर से यह भी दावा किया गया कि इस आवास को लेकर कई सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं।

पप्पू यादव ने राबड़ी देवी का किया समर्थन

इस विवाद में पूर्णिया सांसद Pappu Yadav भी राबड़ी देवी के समर्थन में सामने आए हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील की कि जिस मंत्री को यह आवास आवंटित किया गया है, उन्हें कोई दूसरा सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाए।

पप्पू यादव ने कहा कि राबड़ी देवी केवल एक राजनीतिक परिवार की सदस्य नहीं हैं, बल्कि बिहार के बड़े हिस्से में लोग उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। इसलिए इस मामले को संवेदनशीलता के साथ संभालना चाहिए।

क्यों महत्वपूर्ण बन गया है यह विवाद?

यह मामला केवल एक सरकारी बंगले के आवंटन तक सीमित नहीं रह गया है। अब इसमें सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक पहलू भी जुड़ गए हैं।

एक तरफ सरकार नियमों और आवास आवंटन प्रक्रिया की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रहा है। मंत्री नंद किशोर राम के दलित समाज से जुड़े बयान ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और क्या आवास खाली कराने की प्रक्रिया तेज होती है या फिर कोई नया समाधान निकलता है।

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