पटना। बिहार समर कैंप 2026 की शुरुआत सोमवार से होने जा रही है। बिहार समर कैंप 2026 के तहत राज्य के करीब 80 हजार गांव-टोलों में सरकारी विद्यालयों के बच्चों के लिए विशेष शिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। गर्मी की छुट्टियों के दौरान आयोजित होने वाले इस अभियान का उद्देश्य बच्चों की भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताओं को मजबूत बनाना है।
शिक्षा विभाग के अनुसार पांचवीं और छठी कक्षा के विद्यार्थियों को विशेष रूप से इस कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। खेल, कहानी, पठन-पाठन और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाया जाएगा।
80 हजार गांवों में लगेंगे समर कैंप
राज्यभर के लगभग 80 हजार गांव और टोलों में समर कैंप आयोजित किए जाएंगे। हर कैंप में एक स्वयंसेवक बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेगा।
एक स्वयंसेवक के पास 10 से 15 बच्चों का समूह होगा। बच्चों को प्रतिदिन लगभग डेढ़ घंटे तक भाषा और गणित की विशेष कक्षाएं दी जाएंगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि छोटे समूहों में पढ़ाई कराने से बच्चों की सीखने की क्षमता में तेजी से सुधार होगा।
स्वयंसेवक निभाएंगे अहम भूमिका
इस कार्यक्रम में शिक्षा सेवक, तालीमी मरकज से जुड़े कार्यकर्ता और स्थानीय स्वयंसेवक भाग लेंगे। प्रत्येक मध्य विद्यालय से भी दो से तीन स्वयंसेवकों को चिन्हित किया गया है।
इन स्वयंसेवकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है ताकि वे बच्चों को प्रभावी तरीके से पढ़ा सकें। खास बात यह है कि अधिकांश स्वयंसेवक इस अभियान में निःशुल्क सेवा देंगे।
कैंप का स्थान बच्चों की संख्या और उनके निवास क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
30 जून तक चलेगा विशेष शिक्षण अभियान
समर कैंप 30 जून तक संचालित किए जाएंगे। इस दौरान बच्चों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि गतिविधि आधारित शिक्षा पर जोर दिया जाएगा।
कहानी सुनाना, समूह चर्चा, खेल-खेल में गणित सीखना और रचनात्मक अभ्यास जैसे कार्यक्रम शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छुट्टियों के दौरान इस तरह की गतिविधियां बच्चों की शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने में मदद करती हैं।
पटना के 50 स्कूलों में भी विशेष आयोजन
पटना जिले में समर कैंप के लिए 50 विद्यालयों का चयन किया गया है। इन स्कूलों में पहली से छठी कक्षा तक के विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा।
यह कैंप 21 जून तक चलेगा। हर दिन सुबह 7 बजे से 9 बजे तक दो घंटे की विशेष कक्षाएं आयोजित होंगी।
जिला शिक्षा कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) कृतिका वर्मा के अनुसार फुलवारीशरीफ, नौबतपुर और बिक्रम प्रखंड के चयनित विद्यालयों में यह कार्यक्रम संचालित होगा।
इन स्कूलों में पहले से फाउंडेशन लिटरेसी सशक्तीकरण और पुस्तकालय कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है, जिससे बच्चों को अतिरिक्त सीखने का अवसर मिलेगा।
बच्चों को भाषा और गणित में बनाया जाएगा दक्ष
समर कैंप का मुख्य लक्ष्य बच्चों की भाषा और गणित संबंधी बुनियादी समझ को मजबूत करना है।
इसी उद्देश्य से विशेष अध्ययन सामग्री और पुस्तकें भी उपलब्ध कराई गई हैं। कक्षा एक और दो के बच्चों के लिए अलग समूह बनाए जाएंगे, जबकि कक्षा चार से छह तक के विद्यार्थियों के लिए अलग सत्र आयोजित होंगे।
शिक्षकों और स्वयंसेवकों का प्रयास रहेगा कि बच्चे पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि आनंददायक अनुभव के रूप में लें।
प्रतिदिन क्या-क्या गतिविधियां होंगी?
समर कैंप में बच्चों के लिए समयबद्ध गतिविधियां तय की गई हैं, ताकि सीखने और मनोरंजन का संतुलन बना रहे।
- खेल गतिविधि – 10 मिनट
- कहानी और अनुच्छेद पठन – 20 मिनट
- ध्वनि एवं चिन्ह अभ्यास – 10 मिनट
- शब्दकोष गतिविधि – 15 मिनट
- आज का सवाल – 10 मिनट
इन गतिविधियों के जरिए बच्चों की भाषा, अभिव्यक्ति, तार्किक सोच और गणितीय समझ विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने की पहल
गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार बुनियादी शिक्षा पर फोकस करने से आगे की कक्षाओं में विद्यार्थियों का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है।
राज्य स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर आयोजित यह अभियान शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
