पटना। बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों को बड़ा झटका लगा है। बिहार पंचायत चुनाव 2026 के लिए इस्तेमाल होने वाली नई मल्टी पोस्ट एस-3 ईवीएम की आपूर्ति निर्धारित समय पर नहीं हो सकी है। निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण मशीनों की आपूर्ति में करीब एक महीने की देरी हुई है। इसका असर चुनावी तैयारियों, प्रशिक्षण कार्यक्रम और संभावित चुनाव शेड्यूल पर पड़ सकता है।
नई ईवीएम का निर्माण हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) कर रही है। पहली बार इन मशीनों का उपयोग नगर निकाय चुनावों और पंचायत चुनावों में किया जाना है।
क्यों प्रभावित हुई नई EVM की आपूर्ति?
निर्वाचन आयोग से जुड़ी जानकारी के अनुसार नई मल्टी पोस्ट एस-3 ईवीएम में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक चिप और उपकरण विदेशों से प्राप्त कच्चे माल पर निर्भर हैं।
वैश्विक स्तर पर पैदा हुई अस्थिर परिस्थितियों के कारण आवश्यक सामग्री की उपलब्धता प्रभावित हुई, जिससे मशीनों के निर्माण और आपूर्ति की प्रक्रिया धीमी पड़ गई।
आयोग को अप्रैल महीने में ईवीएम की आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन वास्तविक आपूर्ति मई में शुरू हो सकी। इससे पूरी प्रक्रिया लगभग एक महीने पीछे खिसक गई है।
अभी तक सिर्फ पटना पहुंची हैं मशीनें
जानकारी के मुताबिक राज्य के अधिकांश जिलों में नई ईवीएम अभी तक नहीं पहुंची हैं। फिलहाल पटना में करीब 3600 ईवीएम सेट उपलब्ध कराए गए हैं।
निर्वाचन आयोग का लक्ष्य सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से मशीनें पहुंचाना है। जून के मध्य तक राज्य के सभी जिलों में ईवीएम भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है।
हर जिले में मशीनों के सुरक्षित भंडारण के लिए पहले से व्यवस्था की जा चुकी है। कई जिलों के जिलाधिकारियों ने वेयरहाउस और स्टोरेज सेंटर का निरीक्षण भी किया है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम पर पड़ सकता है असर
नई ईवीएम की आपूर्ति में देरी का सबसे बड़ा असर प्रशिक्षण कार्यक्रम पर पड़ सकता है। क्योंकि यह मशीन पहली बार चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होगी, इसलिए मतदान कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देना जरूरी है।
आयोग ने नगर निकाय चुनावों के लिए मास्टर ट्रेनरों को तैयार कर लिया है। ये प्रशिक्षक आगे जिलों में जाकर मतदान कर्मियों को नई मशीन की कार्यप्रणाली समझाएंगे।
हालांकि सभी जिलों में मशीनें पहुंचने के बाद ही राज्य और जिला स्तर पर व्यापक प्रशिक्षण अभियान शुरू किया जा सकेगा। ऐसे में चुनावी कार्यक्रम तय करने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
कंपनी से सीधे जिलों तक पहुंचेगी EVM
आयोग की योजना के अनुसार ईसीआईएल कंपनी से मशीनों को सीधे जिलों में भेजा जाएगा। इससे परिवहन और वितरण प्रक्रिया को तेज बनाने की कोशिश की जा रही है।
नई मशीनें होने के कारण इनके लिए सामान्य तौर पर की जाने वाली प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) की आवश्यकता नहीं होगी। इससे मशीनों को सीधे चुनावी उपयोग के लिए तैयार किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कुछ समय की बचत जरूर होगी, लेकिन प्रशिक्षण और वितरण की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
पंचायत चुनाव में छह पदों के लिए होगा मतदान
बिहार पंचायत चुनाव में मतदान प्रक्रिया अन्य चुनावों की तुलना में अधिक जटिल होती है। पंचायत चुनाव में कुल छह पदों के लिए मतदान कराया जाता है।
इसी वजह से एक कंट्रोल यूनिट (सीयू) के साथ छह बैलेट यूनिट (बीयू) का उपयोग किया जाएगा। जबकि नगर निकाय चुनावों में एक कंट्रोल यूनिट के साथ केवल तीन बैलेट यूनिट का इस्तेमाल होता है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार राज्यभर के लिए 36,200 कंट्रोल यूनिट सहित कुल 2,17,200 मशीनों की आवश्यकता होगी। यह संख्या चुनाव के विशाल दायरे को दर्शाती है।
नई मल्टी पोस्ट EVM क्या है?
नई मल्टी पोस्ट एस-3 ईवीएम को स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
इस मशीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही मतदान प्रक्रिया में कई पदों के लिए मतदान कराया जा सकता है। इससे मतदान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सक्षम बनती है।
आयोग को उम्मीद है कि नई मशीनों के इस्तेमाल से मतदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुचारु होगी।
चुनावी तैयारियों पर सभी की नजर
फिलहाल निर्वाचन आयोग की प्राथमिकता सभी जिलों में समय पर मशीनों की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम और चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
यदि जून के मध्य तक सभी मशीनें जिलों तक पहुंच जाती हैं तो आयोग को चुनाव कार्यक्रम तय करने में आसानी होगी। हालांकि आपूर्ति में हुई देरी ने प्रशासनिक स्तर पर चुनौती जरूर खड़ी कर दी है।
