CAA-NRC और कृषि बिल प्रदर्शन केस में पप्पू यादव ने किया सरेंडर, अदालत से मिली जमानत


 

पप्पू यादव सरेंडर से जुड़ा मामला बुधवार को पटना की विशेष अदालत में चर्चा का विषय बना रहा। सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव सरेंडर करने के लिए अदालत पहुंचे, जहां 2020 में CAA-NRC और कृषि बिल के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़े दो मामलों की सुनवाई हुई। आत्मसमर्पण के बाद उनकी ओर से जमानत याचिका दायर की गई, जिस पर अदालत ने सुनवाई करते हुए उन्हें राहत प्रदान की। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।

यह मामला उन प्रदर्शनों से जुड़ा है जो वर्ष 2020 में पटना के प्रतिबंधित क्षेत्रों में आयोजित किए गए थे। दोनों मामलों में पुलिस ने अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की थी।

विशेष अदालत में किया आत्मसमर्पण

सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत में पप्पू यादव ने आत्मसमर्पण किया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश प्रवीण कुमार मालवीय की अदालत में हुई।

आत्मसमर्पण के साथ ही उनकी ओर से दोनों मामलों में जमानत की मांग की गई। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।

10-10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर मिली राहत

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े तथ्यों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार किया। इसके बाद प्रत्येक मामले में 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश जारी किया गया।

अदालत ने समान राशि के दो-दो जमानतदारों के बंध पत्र जमा करने की भी शर्त रखी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पप्पू यादव को रिहा कर दिया गया।

क्या है पहला मामला?

पहला मामला वर्ष 2020 में दर्ज कोतवाली थाना कांड संख्या 133/2020 से जुड़ा है। आरोप है कि 23 फरवरी 2020 को CAA और NRC के विरोध में पटना के डाकबंगला चौराहा स्थित प्रतिबंधित क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन किया गया था।

पुलिस ने इस प्रदर्शन को लेकर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसी केस में अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया गया।

कृषि बिल विरोध प्रदर्शन से जुड़ा दूसरा केस

दूसरा मामला कोतवाली थाना कांड संख्या 390/2020 से संबंधित है। यह केस 25 सितंबर 2020 को कृषि बिल के विरोध में आयोजित प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है।

आरोप है कि आयकर गोलंबर स्थित प्रतिबंधित क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन किया गया था। पुलिस ने उस समय इस मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की थी।

इसी मामले में भी पप्पू यादव ने अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत की मांग की।

अदालत में क्या हुई सुनवाई?

अदालत में दोनों मामलों को लेकर अलग-अलग सुनवाई की गई। पप्पू यादव की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा और जमानत देने की मांग की।

दूसरी ओर मामले से जुड़े रिकॉर्ड और कानूनी पहलुओं को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने का निर्णय लिया।

राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

यह मामला केवल एक व्यक्ति से जुड़ा कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि उन प्रदर्शनों से भी संबंधित है जो नागरिकता संशोधन कानून (CAA), NRC और कृषि कानूनों को लेकर देशभर में हुए थे।

वर्ष 2020 में कई राज्यों में इन मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। बिहार की राजधानी पटना में भी विभिन्न संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई थी।

हालांकि वर्तमान सुनवाई केवल दर्ज मामलों में आत्मसमर्पण और जमानत की प्रक्रिया तक सीमित रही। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।

एक नजर में पूरा मामला

  • सांसद राजेश रंजन उर्फ Pappu Yadav ने विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया।
  • मामला CAA-NRC और कृषि बिल विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है।
  • दोनों घटनाएं वर्ष 2020 में पटना के प्रतिबंधित क्षेत्रों में हुई थीं।
  • अदालत ने प्रत्येक मामले में 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी।
  • दो-दो जमानतदारों के बंध पत्र जमा करने की शर्त भी लगाई गई।
  • कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

आगे क्या होगा?

मामले की आगे की सुनवाई अदालत में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी। संबंधित पक्ष भविष्य की तारीखों पर अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।

फिलहाल अदालत के आदेश के बाद पप्पू यादव को दोनों मामलों में जमानत मिल चुकी है और वे कानूनी शर्तों के तहत मुक्त हैं।

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