NEET री-एग्जाम में बड़ा खुलासा, छात्र की जगह परीक्षा देने बैठे डॉक्टर, 24 गिरफ्तार

 


लखीसराय: बिहार में आयोजित NEET री-एग्जाम के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। NEET री-एग्जाम से जुड़ी जांच में पुलिस ने कथित सॉल्वर गैंग के सरगना समेत 24 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने की तैयारी की गई थी। मामले में मेडिकल कॉलेजों के छात्रों और बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मचारियों के नाम सामने आने के बाद पूरे नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में कई ऐसे सबूत मिले हैं जो संगठित तरीके से परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की ओर इशारा करते हैं। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।

री-एग्जाम के दौरान सामने आया सॉल्वर गैंग

3 मई को कथित पेपर लीक विवाद के बाद NEET-UG 2026 का री-एग्जाम आयोजित किया गया था। इसी दौरान लखीसराय पुलिस को सूचना मिली कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर सॉल्वर गैंग सक्रिय है।

सूचना के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग केंद्रों पर कार्रवाई की। जांच और छापेमारी के बाद कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें कथित सॉल्वर, नेटवर्क संचालक और अन्य सहयोगी शामिल बताए जा रहे हैं।

पुलिस को आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य सामग्री भी मिली है। इनकी फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की जा रही है।

मेडिकल छात्रों से 30 से 40 लाख रुपये तक की डील का आरोप

जांच में सामने आया है कि मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे कुछ छात्रों को कथित तौर पर सॉल्वर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।

पुलिस के अनुसार, इसके लिए 30 से 40 लाख रुपये तक की डील तय होने की जानकारी मिली है। गिरफ्तार लोगों में पीएमसीएच (PMCH), गया मेडिकल कॉलेज, AIIMS रायबरेली और BHU से जुड़े छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके तार किन-किन राज्यों तक फैले हुए हैं।

इसके अलावा पैसों के लेन-देन, संपर्क सूत्रों और संभावित लाभार्थियों की भी जांच की जा रही है।

बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी भी जांच के घेरे में

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की गिरफ्तारी है।

पुलिस ने बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से जुड़ी कंपनी के 14 कर्मचारियों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि उनकी मदद से फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाने की कोशिश की गई।

यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह परीक्षा सुरक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

PMCH छात्र मयंक से खुली नेटवर्क की परतें

पूरे मामले में हाजीपुर निवासी मयंक का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। पुलिस के अनुसार, वह PMCH का छात्र है और उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच को नई दिशा मिली।

आरोप है कि वह कथित तौर पर बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों से संपर्क में था और कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में सफल हो गया था।

पुलिस ने उसे मौके पर पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर अन्य परीक्षा केंद्रों पर भी कार्रवाई की गई।

इसके बाद कई और संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और कथित नेटवर्क का दायरा सामने आने लगा।

स्वास्थ्य विभाग की रणनीति पर भी उठे सवाल

सॉल्वर गैंग की गतिविधियों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले से विशेष व्यवस्था की थी।

जानकारी के अनुसार, राज्य के मेडिकल कॉलेजों में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक सेमिनार और क्विज कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इनमें छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य रखी गई थी।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि MBBS छात्र परीक्षा अवधि के दौरान बाहर न जा सकें और किसी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल न हों।

हालांकि, PMCH के छात्र की गिरफ्तारी के बाद इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। अब संबंधित विभाग सुरक्षा और निगरानी तंत्र की समीक्षा करने की तैयारी में है।

आगे की जांच में क्या होगा?

फिलहाल पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि इस कथित सॉल्वर गैंग का संचालन कौन कर रहा था, किन अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया और किस स्तर तक मिलीभगत हुई।

साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि क्या यह मामला केवल कुछ परीक्षा केंद्रों तक सीमित था या इसके तार बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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