बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चर्चा का केंद्र बने लालू यादव सुरक्षा मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। लालू यादव सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे विवाद के बीच अब राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर फिर से पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। हालांकि इस बार सुरक्षाकर्मियों की संख्या पहले की तुलना में कम रखी गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह निर्धारित नियमों और समीक्षा प्रक्रिया के अनुसार की गई है।
सुरक्षा बहाल होने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्क रख रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे नियमित प्रक्रिया बता रहा है।
सुरक्षा लौटाने के बाद फिर हुई तैनाती
हाल ही में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और कई अन्य राजद नेताओं ने अपनी सुरक्षा वापस कर दी थी। इसके बाद उनके आवास पर तैनात जवान और अधिकारी पुलिस लाइन लौट गए थे।
अब जिला प्रशासन ने दोबारा सुरक्षा व्यवस्था लागू करते हुए करीब 42 पुलिसकर्मियों की तैनाती की है। इनमें पुलिस अधिकारी और दारोगा स्तर के कर्मी भी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, लालू-राबड़ी आवास पर लगातार लोगों और समर्थकों की आवाजाही बनी रहती है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था को आवश्यक माना गया है।
पहले से कम हुई जवानों की संख्या
नई व्यवस्था में सुरक्षाकर्मियों की संख्या पहले की तुलना में कम रखी गई है। यही वजह है कि इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
पहले लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी। इस श्रेणी में आमतौर पर बड़ी संख्या में कमांडो और पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाती है।
सुरक्षा समीक्षा समिति द्वारा हाल में सुरक्षा व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन किया गया था। इसी प्रक्रिया के तहत सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं।
मंत्री श्रवण कुमार ने क्या कहा?
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लालू परिवार को निर्धारित नियमों के अनुसार पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करती है और उसी के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं। उनके अनुसार इस मामले में किसी नियम या कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
मंत्री ने यह भी कहा कि सुरक्षा से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
लेशी सिंह ने भी दिया जवाब
भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार किसी भी मामले में दुर्भावना से काम नहीं करती।
उनके अनुसार चाहे आवास आवंटन का मामला हो या सुरक्षा व्यवस्था का, सभी निर्णय निर्धारित प्रक्रियाओं और नियमों के तहत लिए जाते हैं।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता के मुद्दों की बजाय राजनीतिक विवादों को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
जेड प्लस सुरक्षा में क्या होती है व्यवस्था?
जेड प्लस सुरक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा श्रेणियों में गिनी जाती है। यह सुरक्षा आमतौर पर उन व्यक्तियों को दी जाती है जिन्हें सुरक्षा एजेंसियां विशेष खतरे की श्रेणी में मानती हैं।
इस श्रेणी में आम तौर पर 40 से 50 तक प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी, कमांडो और अन्य पुलिसकर्मी तैनात किए जाते हैं। सुरक्षा स्तर का निर्धारण संबंधित एजेंसियों और सुरक्षा समीक्षा समिति की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है।
हाल के दिनों में हुई समीक्षा के बाद बिहार में कुछ नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया था।
तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी हुआ था बदलाव
सुरक्षा समीक्षा के दौरान केवल लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ही नहीं, बल्कि उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की सुरक्षा व्यवस्था में भी कटौती की गई थी।
इसके बाद कई राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया था। कुछ नेताओं ने अपनी सुरक्षा वापस करने का भी फैसला लिया था।
इसी दौरान राबड़ी देवी के आवास के बाहर कई समर्थक और कार्यकर्ता सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए मौजूद रहे थे। यह तस्वीरें भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी थीं।
अब आगे क्या?
फिलहाल लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के आवास पर 42 पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। प्रशासन इसे सुरक्षा जरूरतों और निर्धारित नियमों के अनुरूप कदम बता रहा है।
दूसरी ओर, विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विषय बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अंतिम निर्णय सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा और प्रशासनिक आकलन पर निर्भर करेगा। फिलहाल सुरक्षा बहाली के बाद राजनीतिक हलचल फिर तेज होती दिखाई दे रही है।
