केतन अग्रवाल केस में नया मोड़, मित्तल परिवार का बयान और किले में हुआ सीन रीक्रिएशन

 


केतन अग्रवाल केस में मित्तल परिवार की एंट्री, पुलिस जांच में आया नया मोड़

केतन अग्रवाल केस में जांच लगातार आगे बढ़ रही है और अब केतन अग्रवाल केस में मित्तल परिवार का बयान भी सामने आया है। पुलिस जांच के बीच उन रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई जिन्होंने केतन अग्रवाल और सिया गोयल के परिवारों की पहली मुलाकात कराई थी। वहीं, दूसरी ओर जांच टीम ने लोहागढ़ किले में घटनास्थल का सीन रीक्रिएशन कर पूरे घटनाक्रम को दोबारा समझने की कोशिश की है। मामले में जुट रहे नए तथ्यों के बीच पुलिस कई पहलुओं की जांच कर रही है।

यह मामला पिछले कुछ दिनों से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मित्तल परिवार ने क्या कहा?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नरेंद्र मित्तल और रेणु मित्तल ने पुलिस को बताया कि उन्होंने केवल दोनों परिवारों की पहली मुलाकात कराई थी।

उनका कहना है कि जनवरी 2026 में रिश्ता तय कराने के लिए दोनों परिवारों को मिलवाया गया था। इसके बाद सगाई, शादी की तारीख और अन्य सभी निर्णय दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से लिए। इन प्रक्रियाओं में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

रेणु मित्तल ने कहा कि वे बचपन से सिया गोयल को जानते थे और उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि वह इस तरह का कोई कदम उठा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि शादी नहीं करनी थी तो उससे इनकार किया जा सकता था।

नरेंद्र मित्तल ने भी पुलिस को दिए बयान में कहा कि दोनों परिवारों के बीच बातचीत सामान्य तरीके से आगे बढ़ रही थी और प्रस्तावित शादी नवंबर 2026 में तय की गई थी।

केतन के पिता ने क्या दावा किया?

केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने कहा कि मित्तल परिवार की सहमति के बाद ही उनका परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार हुआ था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष को रिश्ते की पूरी जानकारी थी। हालांकि, इन दावों की जांच पुलिस कर रही है और अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

लोहागढ़ किले में हुआ सीन रीक्रिएशन

जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने रविवार को आरोपी सिया गोयल को लोहागढ़ किले ले जाकर पूरे घटनाक्रम का सीन रीक्रिएट कराया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान आरोपियों के बताए गए रास्ते, घटनास्थल पर उनकी स्थिति और कथित घटनाक्रम को दोबारा समझने का प्रयास किया गया।

जांच टीम ने यह भी देखा कि घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियां आरोपियों के बयानों से कितनी मेल खाती हैं।

डमी के जरिए जांची गई धक्का देने की थ्योरी

जांच के दौरान पुलिस ने केतन अग्रवाल के लगभग समान वजन का एक डमी तैयार कराया।

इस डमी का उपयोग यह परखने के लिए किया गया कि जिस स्थान का उल्लेख जांच में सामने आया है, वहां से किसी व्यक्ति को धक्का देना व्यावहारिक रूप से संभव था या नहीं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया फोरेंसिक और तकनीकी जांच का हिस्सा है, जिससे घटनाक्रम की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है।

जांच एजेंसियां किन पहलुओं पर कर रही हैं काम?

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सीन रीक्रिएशन के दौरान आरोपी ने घटनास्थल तक पहुंचने के रास्ते, वहां मौजूद लोगों की स्थिति और कथित घटनाओं के क्रम की जानकारी दी।

जांच एजेंसी इन बयानों का मिलान तकनीकी साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध सबूतों से कर रही है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

बचाव पक्ष ने क्या कहा?

सिया गोयल की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि बचाव पक्ष अपनी दलीलें एफआईआर में दर्ज तथ्यों और अब तक हुई जांच के आधार पर अदालत के समक्ष रखेगा।

उन्होंने कहा कि उनकी मुवक्किल ने जांच में सहयोग किया है और पुलिस को पूछताछ के लिए पर्याप्त समय मिल चुका है। बचाव पक्ष का कहना है कि अदालत में सभी कानूनी पहलुओं को विस्तार से रखा जाएगा।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बचाव पक्ष यह तर्क रखेगा कि जांच एजेंसी ने किन आधारों पर मामले को आकस्मिक मृत्यु से संभावित हत्या के मामले के रूप में देखा।

जांच अभी जारी, अंतिम निष्कर्ष का इंतजार

केतन अग्रवाल केस में लगातार नए बयान और जांच से जुड़े तथ्य सामने आ रहे हैं। हालांकि, अभी तक पुलिस ने जांच पूरी नहीं की है और कई पहलुओं की पुष्टि बाकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होता है। इसलिए किसी भी दावे या आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक जांच पूरी होने का इंतजार करना आवश्यक है।

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