
G7 Summit 2026 में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को फ्रांस के एवियन शहर पहुंच गए। G7 Summit 2026 के दौरान उनकी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात हुई। करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली बैठक रही। इस सम्मेलन में भारत की मौजूदगी एक बार फिर वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के बीच हो रहे इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक सहयोग और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे अहम विषयों पर चर्चा की जा रही है। भारत को लगातार आठवीं बार जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी बढ़ती स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है।
भारत को लगातार आठवीं बार मिला जी7 का निमंत्रण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस पहुंचने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वह विश्व नेताओं के साथ महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने और सामूहिक समाधान तलाशने के लिए उत्सुक हैं। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत एक टिकाऊ, समृद्ध और बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। लगातार आठवीं बार जी7 में आमंत्रण मिलना भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव का संकेत माना जा रहा है।
ट्रंप और मोदी की 16 महीने बाद आमने-सामने मुलाकात
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात विशेष चर्चा का विषय रही। दोनों नेताओं की यह पहली प्रत्यक्ष मुलाकात करीब 16 महीने बाद हुई है। हालांकि बैठक का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों, वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत और अमेरिका की साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई देशों के नेताओं से करेंगे द्विपक्षीय वार्ता
जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मंच भारत को अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने में भी मदद मिलती है।
जिनेवा और स्लोवाकिया दौरे के बाद फ्रांस पहुंचे पीएम
फ्रांस पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी जिनेवा में थे, जहां स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति Guy Parmelin ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने Slovakia का दौरा भी किया था। उन्होंने इस यात्रा को ऐतिहासिक और सार्थक बताया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस दौरे से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।
वैश्विक मंच पर क्यों महत्वपूर्ण है भारत की मौजूदगी?
जी7 समूह दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का मंच है। भारत इसका स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जा रहा है। भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ती वैश्विक भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका के कारण उसकी उपस्थिति लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषयों पर भारत का दृष्टिकोण दुनिया के कई देशों के लिए अहम माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जी7 जैसे मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी न केवल उसकी वैश्विक स्थिति को मजबूत करती है, बल्कि निवेश, व्यापार और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर भी पैदा करती है।