बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को लेकर दिलीप जायसवाल बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। एक मीडिया बातचीत के दौरान दिए गए दिलीप जायसवाल बयान में उन्होंने विभाग में फैले भ्रष्टाचार की तुलना गंभीर बीमारी से की और खुद को ‘करप्शन रोकने वाला डॉक्टर’ बताया। मंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार जैसी समस्या का समाधान एक झटके में नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए चरणबद्ध सुधार की जरूरत होती है।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। खासकर उनके उस बयान पर चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा कि “बुखार एक बार में उतार देंगे तो मरीज मर जाएगा, इसलिए हम धीरे-धीरे इलाज कर रहे हैं।”
भ्रष्टाचार पर मंत्री ने दी ‘बुखार’ वाली मिसाल
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए दिलीप जायसवाल ने कहा कि राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है। इसे खत्म करने के लिए जल्दबाजी नहीं बल्कि व्यवस्थित रणनीति की जरूरत है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह किसी मरीज के तेज बुखार का इलाज धीरे-धीरे दवा देकर किया जाता है, उसी तरह विभाग में सुधार भी क्रमिक रूप से किए जा रहे हैं।
मंत्री के अनुसार, अगर व्यवस्था में अचानक बड़े बदलाव किए जाएं तो उसका असर विभागीय कामकाज पर पड़ सकता है। इसलिए सुधार प्रक्रिया को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
पूर्व कार्यकाल पर इशारों में टिप्पणी
अपने बयान के दौरान दिलीप जायसवाल ने पूर्व के विभागीय हालात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने विभाग की जिम्मेदारी संभाली, तब स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी।
मंत्री ने संकेत दिया कि पहले किए गए कुछ कदमों के बाद विभाग में व्यापक असंतोष की स्थिति बन गई थी। हालांकि उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को पूर्व विभागीय नेतृत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान ने सत्ताधारी दल के भीतर भी चर्चा को नया विषय दे दिया है।
हड़ताल और लंबित मामलों को बताया बड़ी चुनौती
दिलीप जायसवाल ने कहा कि जब उन्होंने विभाग का कार्यभार संभाला, उस समय कर्मचारियों की लंबी हड़ताल चल रही थी। इसके कारण बड़ी संख्या में भूमि और राजस्व संबंधी आवेदन लंबित हो गए थे।
उन्होंने बताया कि विभाग की प्राथमिकता पहले इन लंबित मामलों का समाधान करना रही है। लाखों लोगों के आवेदन लंबे समय से अटके हुए थे, जिससे आम नागरिकों को परेशानी हो रही थी।
मंत्री के अनुसार, अब विभाग उन मामलों के निपटारे की दिशा में तेजी से काम कर रहा है और धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है।
‘ऊपर से ईमानदारी होगी तो नीचे असर दिखेगा’
राजस्व मंत्री ने भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराने की सोच को पर्याप्त नहीं माना।
उन्होंने कहा कि किसी भी विभाग में सुधार की शुरुआत शीर्ष स्तर से होनी चाहिए। यदि मंत्रालय और नेतृत्व पारदर्शी और जवाबदेह होगा, तभी नीचे तक सकारात्मक संदेश जाएगा।
मंत्री ने कहा कि एक मंत्री के पास नीतिगत बदलाव करने की शक्ति होती है और उसी का उपयोग कर विभागीय व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
‘करप्शन रोकने वाला डॉक्टर’ बयान क्यों बना चर्चा का विषय?
दिलीप जायसवाल का “मैं करप्शन रोकने वाला डॉक्टर हूं” वाला बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तेजी से वायरल हो रहा है।
दरअसल, उन्होंने भ्रष्टाचार की तुलना एक ऐसी बीमारी से की, जिसका इलाज समय लेकर और सही रणनीति के साथ करना जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने खुद को उस बीमारी का इलाज करने वाला डॉक्टर बताया।
उनका कहना था कि विभाग में फैली समस्याओं को पहचान लिया गया है और उनका समाधान भी शुरू कर दिया गया है। आने वाले समय में इसके परिणाम दिखने लगेंगे।
राजस्व विभाग में सुधार की राह पर नजर
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग बिहार के उन विभागों में शामिल है, जिनका सीधा संबंध आम जनता से होता है। जमीन संबंधी विवाद, दाखिल-खारिज, रसीद और अन्य सेवाओं के लिए लोग इसी विभाग पर निर्भर रहते हैं।
ऐसे में विभाग में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के प्रयास आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। फिलहाल मंत्री के बयान के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि विभागीय सुधारों का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर इस बयान की चर्चा जारी है और आने वाले दिनों में इस पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।
