Bihar Panchayat Elections: 15 जून तक आ सकती है आरक्षण गाइडलाइन, चुनावी तस्वीर होगी साफ


पटना। Bihar Panchayat Elections की तैयारियां राज्यभर में तेज हो गई हैं, लेकिन Bihar Panchayat Elections से पहले आरक्षण रोस्टर जारी नहीं होने के कारण संभावित उम्मीदवारों और ग्रामीणों के बीच अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोग लंबे समय से आरक्षण सूची का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच विभागीय सूत्रों से संकेत मिले हैं कि 15 जून तक पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण संबंधी गाइडलाइन जारी की जा सकती है। यदि तय समय के भीतर गाइडलाइन जारी होती है तो पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण तस्वीरें साफ हो जाएंगी। इसके बाद संभावित उम्मीदवार अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे सकेंगे।

पंचायत चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में

पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है। चुनाव से जुड़ी व्यवस्थाओं के तहत ईवीएम मशीनों के सुरक्षित रखरखाव के लिए भी स्थानों का चयन किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी चुनावी माहौल धीरे-धीरे बनना शुरू हो गया है। संभावित उम्मीदवार अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ा रहे हैं, हालांकि आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से कई लोग अंतिम निर्णय लेने से बच रहे हैं।

2006 और 2016 के रोस्टर का हो रहा अध्ययन

विभागीय जानकारी के अनुसार पंचायत आरक्षण रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए वर्ष 2006 और 2016 के आरक्षण रोस्टर का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है। बताया गया है कि दोनों रोस्टर राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। वर्ष 2016 का आरक्षण रोस्टर 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार किया गया था, जबकि 2006 का रोस्टर पुराने आधार पर बनाया गया था। अब विभाग दोनों आंकड़ों और पूर्व आरक्षण व्यवस्था का विश्लेषण कर नया आरक्षण रोस्टर तैयार कर रहा है। इसी प्रक्रिया के आधार पर आगामी पंचायत चुनाव में विभिन्न पदों के लिए आरक्षण तय किया जाएगा।

15 जून तक जारी हो सकती है बड़ी गाइडलाइन

सूत्रों के अनुसार राज्य स्तर से 15 जून तक पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण संबंधी गाइडलाइन जारी होने की संभावना है। इस गाइडलाइन का इंतजार पूरे राज्य में किया जा रहा है। गाइडलाइन जारी होने के बाद सभी प्रखंडों से आरक्षण सूची मांगी जाएगी। इसके बाद जिला प्रशासन संबंधित सूची का परीक्षण कर उसे अंतिम रूप देगा। अंतिम सूची राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी। आयोग की मंजूरी मिलने के बाद ही पंचायतों के लिए आरक्षण सूची आधिकारिक रूप से लागू होगी और चुनावी प्रक्रिया उसी आधार पर आगे बढ़ेगी।

दावा-आपत्ति की प्रक्रिया लगभग पूरी

चुनावी तैयारियों के दौरान दावा और आपत्ति से जुड़े मामलों के निपटारे का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश शिकायतों और दावों की जांच कर उनका समाधान कर दिया गया है। अब मुख्य फोकस आरक्षण प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि आरक्षण सूची जारी होने के बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की दिशा में तेजी आ सकती है। इससे चुनावी गतिविधियों को और गति मिलेगी।

महाराजगंज की 16 पंचायतों में बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

महाराजगंज प्रखंड की 16 पंचायतों में मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और जिला परिषद सदस्य पदों के लिए चुनाव होना है। संभावित उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। गांवों में बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। हालांकि अधिकांश दावेदार आरक्षण रोस्टर का इंतजार कर रहे हैं। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही वे चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ उतरने की रणनीति बनाएंगे।

क्या बोले बीडीओ?

महाराजगंज प्रखंड के बीडीओ बिंदु कुमार ने बताया कि प्रखंड की सभी 16 पंचायतों के लिए वर्ष 2006 और 2016 के आरक्षण रोस्टर को पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आगे की प्रक्रिया राज्य स्तर से जारी होने वाली गाइडलाइन के अनुसार पूरी की जाएगी। प्रशासन चुनाव संबंधी सभी तैयारियों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है।

आरक्षण सूची जारी होते ही बदलेगी चुनावी तस्वीर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक होता है। इसी आधार पर उम्मीदवारों की रणनीति और चुनावी समीकरण तय होते हैं। आरक्षण गाइडलाइन जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस पंचायत में कौन-सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी। इसके बाद गांवों में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। फिलहाल पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हजारों संभावित उम्मीदवारों की निगाहें 15 जून पर टिकी हुई हैं। आरक्षण सूची सामने आते ही बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी माहौल पूरी तरह सक्रिय हो सकता है। 

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