बुजुर्गों के लिए खुला खजाना, बिहार कैबिनेट के 25 बड़े फैसलों को मंजूरी

 


बिहार कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और जनकल्याण से जुड़े 25 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। बिहार कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों का असर सीधे तौर पर बुजुर्गों, किसानों, युवाओं और ग्रामीण आबादी पर पड़ने वाला है। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये जारी करने के साथ-साथ रोजगार, जलापूर्ति, सिंचाई और तकनीकी विकास से जुड़ी कई नई योजनाओं को भी मंजूरी दी है।

राज्य सरकार का दावा है कि इन फैसलों से बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी। कैबिनेट के निर्णयों में ग्रामीण रोजगार से लेकर आईआईटी पटना के विस्तार तक कई अहम पहल शामिल हैं।

पेंशनधारकों के लिए 3662 करोड़ रुपये की मंजूरी

कैबिनेट बैठक का सबसे बड़ा फैसला सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के लिए रहा। सरकार ने इंदिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांगता पेंशन और मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन सहित छह प्रमुख योजनाओं के भुगतान के लिए 3,662.09 करोड़ रुपये के अग्रिम की मंजूरी दी है।

यह राशि बिहार आकस्मिकता निधि से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मई, जून और जुलाई 2026 के दौरान लाखों लाभार्थियों को समय पर पेंशन मिल सकेगी।

सरकार के इस फैसले से बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देगी नई योजना

बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका बढ़ाने के उद्देश्य से "विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)" यानी "विकसित भारत-जी राम जी" योजना को मंजूरी दे दी है।

यह महत्वाकांक्षी योजना 1 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में लागू होगी। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और गांवों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

अमृत 2.0 परियोजनाओं को मिली गति

शहरी विकास के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। बिहारशरीफ, हाजीपुर, बेगूसराय और सहरसा में सीवरेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और जलापूर्ति परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों में स्वच्छ जल और बेहतर सीवरेज व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

शहरी आबादी को भविष्य में बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिलेगी।

किसानों के लिए फिर लागू होगी फसल बीमा योजना

कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बिहार सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को फिर से लागू करने का फैसला किया है।

यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 के रबी सीजन से प्रभावी होगी। इसके तहत प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा या अन्य कारणों से फसल नुकसान होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बिस्कोमान को निर्यात संबंधी गतिविधियों के लिए राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाने का भी निर्णय लिया है।

पुराने वाहनों पर सरकार का बड़ा फैसला

परिवहन विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 15 वर्ष से अधिक पुराने सरकारी और गैर-सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कुछ नियमों में संशोधन किया गया है।

इस कदम का उद्देश्य पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से हटाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को लाभ मिलेगा।

आईआईटी पटना में बनेगा रिसर्च पार्क

शिक्षा और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने आईआईटी पटना से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है।

इसके तहत आईआईटी पटना में रिसर्च पार्क का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर फेज-2 के अंतर्गत नए हॉस्टल भवन भी बनाए जाएंगे।

इन परियोजनाओं का संचालन और प्रबंधन आईआईटी पटना स्वयं करेगा। इससे शोध, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ताकत मिलने की उम्मीद है।

डिजिटल बिहार की दिशा में नया कदम

कैबिनेट ने राष्ट्रीय सूचना केंद्र (NIC) द्वारा विकसित किए जाने वाले "BIHAR SNA-SPARSH" सॉफ्टवेयर के लिए 5.75 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है।

इस सॉफ्टवेयर का उद्देश्य सरकारी वित्तीय लेनदेन को अधिक पारदर्शी और आसान बनाना है।

डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्य के विकास पर पड़ेगा व्यापक असर

कैबिनेट के इन फैसलों का प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। पेंशन, रोजगार, कृषि, शहरी विकास, शिक्षा और डिजिटल प्रशासन जैसे क्षेत्रों में लिए गए निर्णय राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा दे सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में बिहार को आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर लाभ मिल सकता है।

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