
पटना। Bihar MLC Election 2026 के नामांकन के आखिरी दिन राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। Bihar MLC Election 2026 के तहत महागठबंधन की ओर से राजद नेता सुनील कुमार सिंह ने विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। लेकिन उनके नामांकन के तुरंत बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का केंद्र बन गई। पोस्ट में उन्होंने बिना किसी का नाम लिए उम्मीदवार चयन पर गंभीर सवाल उठाए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब विधान परिषद चुनाव को लेकर महागठबंधन अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रहा है। उनके पोस्ट को पार्टी के अंदरूनी असंतोष से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
रोहिणी आचार्य ने पोस्ट में क्या लिखा?
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट साझा की। उन्होंने अपने संदेश में ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए जाने पर सवाल उठाया, जिस पर उन्होंने गुटबाजी, भीतरघात और संगठन को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और नेताओं की अनदेखी चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या पार्टी में योग्य और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की कमी हो गई है, जो ऐसे निर्णय लेने पड़े। हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिखा, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पोस्ट को सुनील कुमार सिंह की उम्मीदवारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
उम्मीदवार चयन को लेकर क्यों उठे सवाल?
रोहिणी आचार्य ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि पार्टी की स्थापना से लेकर अब तक कई ऐसे नेता और कार्यकर्ता जुड़े रहे हैं जिन्होंने संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यादव, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और वंचित वर्गों से आने वाले नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समर्पित चेहरों की अनदेखी पार्टी हित में नहीं मानी जा सकती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनात्मक निर्णय प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंता भी दर्शाती है।
RJD में पहले भी दिख चुकी है नाराजगी
यह पहला मौका नहीं है जब रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के किसी निर्णय पर सवाल उठाए हों। इससे पहले भी विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर उनकी असहमति सामने आ चुकी है। उनकी स्पष्ट और बेबाक शैली अक्सर चर्चा का विषय बनती रही है। यही कारण है कि इस बार की पोस्ट को भी पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि राजद की ओर से अब तक इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नामांकन के बाद क्या बोले सुनील कुमार सिंह?
विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद सुनील कुमार सिंह ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से लालू प्रसाद का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन पर जताए गए भरोसे को वे पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि सदन में संख्या चाहे जितनी भी हो, वे पार्टी की आवाज को मजबूती से उठाएंगे और संगठन के सम्मान को बनाए रखेंगे। सुनील कुमार सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, उसे वे पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ निभाएंगे।
बिहार विधान परिषद चुनाव क्यों है महत्वपूर्ण?
बिहार विधान परिषद की 9 सीटों के नियमित चुनाव और 1 सीट के उपचुनाव के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी है। मांकन के अंतिम दिन सभी दलों के उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की। इस चुनाव को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधान परिषद में संख्या बल और प्रतिनिधित्व को लेकर विभिन्न दल अपनी रणनीति बना रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनाव से पहले उम्मीदवारों के चयन को लेकर उठने वाले सवाल आने वाले दिनों में दलों के अंदरूनी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
आगे क्या रहेगा राजनीतिक असर?
रोहिणी आचार्य की पोस्ट ने एक बार फिर राजद के भीतर चर्चा का माहौल बना दिया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर लगातार नजर बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर, सुनील कुमार सिंह ने संगठन और नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए चुनावी जिम्मेदारी निभाने की बात कही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहता है या फिर इसका असर पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर भी दिखाई देता है।