बिहार में मानसून की सुस्त चाल बढ़ा रही चिंता, 36 जिलों में बारिश की भारी कमी

 


बिहार मानसून इस साल उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। बिहार मानसून के कई जिलों तक पहुंचने के बावजूद राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य बारिश नहीं हो रही है। स्थिति यह है कि 36 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई है, जबकि 18 जिलों में यह कमी 50 प्रतिशत से भी अधिक है। दूसरी ओर, गर्मी और उमस का असर अभी भी लोगों को परेशान कर रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे हालात में सुधार की उम्मीद है।

पिछले दस दिनों तक मुजफ्फरपुर के आसपास ठहरने के बाद मानसून ने आखिरकार कुछ और जिलों में आगे बढ़ना शुरू किया है। पटना, गया, जमुई, शेखपुरा और नवादा में सोमवार को मानसून का असर देखने को मिला।

हालांकि कई इलाकों में मानसून की मौजूदगी के बावजूद पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। यही वजह है कि किसानों और आम लोगों की चिंता बनी हुई है।

पटना और गया में एक सप्ताह की देरी से पहुंचा मानसून

मौसम विभाग के अनुसार, सामान्य मानकों की तुलना में इस बार मानसून पटना और गया में करीब एक सप्ताह की देरी से पहुंचा है।

रविवार और सोमवार की रात पटना के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। लेकिन जिले के अधिकांश क्षेत्रों में अब भी पर्याप्त बारिश का इंतजार है।

मानसून के सीमित प्रभाव के कारण खेतों में नमी की कमी बनी हुई है और खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है।

11 जिलों में आंधी और मेघ गर्जन का अलर्ट

मंगलवार के लिए मौसम विभाग ने 11 जिलों में आंधी, बिजली चमकने और मेघ गर्जन का अलर्ट जारी किया है।

इन जिलों में खगड़िया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वैशाली और जमुई समेत कई इलाके शामिल हैं। लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन गतिविधियों से कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है, जिससे जलस्तर और मिट्टी की नमी में सुधार होगा।

अल नीनो का शुरुआती असर दिखने लगा

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बिहार में इस बार अल नीनो का शुरुआती प्रभाव दिखाई देने लगा है।

अल नीनो की स्थिति बनने पर मानसून की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। यही कारण है कि मानसून का विस्तार होने के बावजूद कई जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं हो रही है।

मौसम विज्ञान केंद्र पटना का कहना है कि अल नीनो के कारण मौसम पूर्वानुमान में अनिश्चितता बढ़ सकती है, लेकिन फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।

राज्यभर में 42 प्रतिशत कम हुई बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 22 जून तक बिहार में औसतन 94.4 मिमी बारिश होनी चाहिए थी।

इसके मुकाबले अब तक केवल 54.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यानी राज्यभर में सामान्य से करीब 42 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।

सबसे चिंताजनक स्थिति राजधानी पटना की है। यहां 22 जून तक 72.7 मिमी बारिश होनी थी, लेकिन केवल 12.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। यह सामान्य से 83 प्रतिशत कम है।

किन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश की कमी?

बारिश की कमी वाले जिलों में पटना सबसे ऊपर है, जहां 83 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है।

इसके अलावा बांका में 80 प्रतिशत, गोपालगंज में 73 प्रतिशत, समस्तीपुर में 72 प्रतिशत, नालंदा और सहरसा में 71 प्रतिशत, सारण और शेखपुरा में 69 प्रतिशत तथा मुजफ्फरपुर में 67 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।

गया में 65 प्रतिशत, भागलपुर में 64 प्रतिशत, वैशाली में 66 प्रतिशत और औरंगाबाद में 57 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

वहीं रोहतास, सीवान, पूर्णिया, दरभंगा, भोजपुर, बेगूसराय, पश्चिमी चंपारण और बक्सर जैसे जिलों में भी 30 से 50 प्रतिशत तक वर्षा की कमी बनी हुई है।

किसानों की बढ़ी चिंता, लेकिन राहत की भी उम्मीद

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर खेती पर पड़ रहा है। सीमांचल और उत्तर बिहार के कई इलाकों में किसान समय पर वर्षा नहीं होने से चिंतित हैं।

हालांकि मौसम विज्ञान केंद्र पटना के निदेशक आशीष कुमार का कहना है कि जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

उनके अनुसार, बंगाल की खाड़ी से मिलने वाला नमी का प्रवाह मानसून को मजबूती देगा। इसलिए फिलहाल राज्य में बड़े पैमाने पर सूखे की आशंका बहुत कम है।

जुलाई में सुधर सकते हैं हालात

विशेषज्ञों का मानना है कि जून में बारिश की कमी के बावजूद जुलाई बिहार के लिए राहत लेकर आ सकता है।

यदि मानसून सक्रिय होता है तो बारिश के आंकड़ों में तेजी से सुधार संभव है। इससे कृषि कार्यों को गति मिलेगी और जल संकट की आशंका भी कम होगी।

फिलहाल मौसम विभाग की नजर मानसून की अगली गतिविधियों पर बनी हुई है और लोगों को नियमित मौसम अपडेट पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

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