बिहार में चीनी उद्योग को मिलेगा नया जीवन, 9 मिलें होंगी चालू, 25 नई मिलों की तैयारी
बिहार चीनी मिल क्षेत्र के लिए बड़ी खबर सामने आई है। बिहार चीनी मिल उद्योग को फिर से पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को राज्य की बंद पड़ी नौ चीनी मिलों के पुनर्जीवन और 25 नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने को कहा है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी, निवेश आएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सोमवार को लोक सेवक आवास में आयोजित गन्ना उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य में गन्ना आधारित उद्योगों के विस्तार और चीनी उद्योग के पुनरुद्धार को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में गन्ना उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
9 बंद चीनी मिलों को फिर से चालू करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया जहां वर्षों से चीनी मिलें बंद पड़ी हैं।
रैयाम, सकरी, सासामुसा, मधौरा, मोतीपुर, समस्तीपुर, चकिया, चनपटिया और मोतिहारी की बंद चीनी मिलों को फिर से शुरू करने के लिए तेजी से काम करने को कहा गया है।
सरकार का मानना है कि इन मिलों के दोबारा चालू होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इससे न केवल किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
25 नई चीनी मिलों की स्थापना पर बनेगी कार्ययोजना
बैठक में मुख्यमंत्री ने सिर्फ पुरानी मिलों के पुनर्जीवन तक सीमित रहने के बजाय भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नई चीनी मिलों की स्थापना की दिशा में भी कदम बढ़ाने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए संभावनाओं का अध्ययन कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए।
यदि यह योजना जमीन पर उतरती है तो बिहार देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। इससे गन्ना किसानों को बड़ा बाजार भी मिलेगा।
चंपारण को गन्ना उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को चंपारण क्षेत्र के लिए विशेष योजना तैयार करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि चंपारण को देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन क्षेत्रों में विकसित करने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर बीज, सिंचाई सुविधाओं और बाजार व्यवस्था पर काम करना होगा।
सरकार की कोशिश है कि किसानों की उत्पादकता बढ़े और उन्हें फसल का उचित मूल्य मिल सके। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
निवेश आकर्षित करने और उद्योगों के आधुनिकीकरण पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निवेशकों को आकर्षित करने, उद्योगों को प्रोत्साहन देने और नई परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर बिहार को औद्योगिक विकास के नए दौर में पहुंचाया जाए। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
हाजीपुर में लगेगी आधुनिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट
इसी बीच उद्योग क्षेत्र से जुड़ी एक और बड़ी घोषणा हुई है। वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित गोरौल फेज-1 औद्योगिक क्षेत्र में अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की मंजूरी दी गई है।
करीब 17.25 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाली यह परियोजना दो एकड़ भूमि पर विकसित होगी। इस इकाई में कुरकुरे, पफ्स और अन्य रेडी-टू-ईट स्नैक उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।
परियोजना के शुरू होने के बाद लगभग 200 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी बढ़ेगा निवेश
बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) की परियोजना समाशोधन समिति ने इस परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है।
उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की परियोजनाएं स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि राज्य सरकार बिहार को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए निवेशकों को हरसंभव सहयोग दे रही है।
किसानों और युवाओं के लिए क्या होगा फायदा?
चीनी मिलों के पुनर्जीवन और नई इकाइयों की स्थापना से किसानों को गन्ने की बिक्री के लिए बेहतर विकल्प मिलेंगे। इससे परिवहन लागत कम होगी और फसल का भुगतान भी समय पर मिलने की संभावना बढ़ेगी।
दूसरी ओर, ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय कारोबार और सेवा क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।
यदि सरकार की यह योजना निर्धारित समय पर लागू होती है, तो बिहार का चीनी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
