NEET Re-Exam घोटाले में बड़ा खुलासा, PMCH छात्र निकला फर्जी ‘मुन्नाभाई’, EOU ने संभाली जांच
बिहार में सामने आए NEET Re-Exam घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। NEET Re-Exam घोटाले से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले की कमान राज्य सरकार के निर्देश पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने अपने हाथों में ले ली है। लखीसराय में दर्ज तीन अलग-अलग कांडों की तकनीकी जांच करते हुए ईओयू पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनमें फर्जी पहचान, बायोमेट्रिक सत्यापन में गड़बड़ी और मेडिकल छात्रों की कथित संलिप्तता शामिल है।
इस मामले ने परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था, कॉलेज प्रशासन और निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फर्जी नाम से परीक्षा केंद्र पहुंचा PMCH का छात्र
जांच में सबसे बड़ा खुलासा उस युवक की पहचान को लेकर हुआ है जिसे पहले पीएमसीएच के चौथे वर्ष के छात्र "मयंक कश्यप" के रूप में गिरफ्तार किया गया था।
ईओयू की जांच में पता चला कि उसका वास्तविक नाम अश्विनी कुमार है। वह पीएमसीएच के 2022 बैच का छात्र है। आरोप है कि उसने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए फर्जी नाम का इस्तेमाल किया और परीक्षा केंद्र तक पहुंच गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने न केवल नाम बदला बल्कि अपनी पहचान छिपाने के लिए कई स्तरों पर भ्रामक जानकारी भी दी। बताया जा रहा है कि उसका रोल नंबर 139 है और वह लंबे समय से इस नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
बायोमेट्रिक एजेंसी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और पहचान सत्यापन की जिम्मेदारी संभालने वाली बायोमेट्रिक एजेंसी "साई एजुकेयर" के कुछ कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
आरोप है कि जिन कर्मचारियों को अभ्यर्थियों के अंगुलियों के निशान और आइरिस स्कैन का सत्यापन करना था, उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसी कारण कथित डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश मिल गया।
पुलिस ने इस मामले में एजेंसी से जुड़े कई सुपरवाइजरों समेत 14 कर्मियों को हिरासत में लिया है। इनसे पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
देश के कई मेडिकल छात्र भी जांच के घेरे में
इस पूरे मामले में केवल स्थानीय स्तर के लोगों की ही नहीं, बल्कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े मेडिकल छात्रों की कथित संलिप्तता भी सामने आई है।
पुलिस ने डमी अभ्यर्थी के रूप में काम करने के आरोप में नौ मेडिकल छात्रों को गिरफ्तार किया है। इनमें एम्स रायबरेली का छात्र सौरभ झा, दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े एमबीबीएस इंटर्न अमन अग्रवाल और झारखंड की दो मेडिकल छात्राएं भी शामिल हैं।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन छात्रों की भूमिका क्या थी और क्या वे किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे।
कॉलेज में दर्ज हुई फर्जी उपस्थिति
जांच के दौरान पीएमसीएच प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी अश्विनी कुमार को कॉलेज के जीवक हॉस्टल में सीट आवंटित थी, लेकिन वह हॉस्टल में नहीं रह रहा था।
बताया जा रहा है कि वह बाहर फ्लैट लेकर रह रहा था, जबकि इसकी जानकारी प्रशासनिक स्तर पर दर्ज नहीं थी। इससे छात्र निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिस दिन नीट पुनर्परीक्षा आयोजित हुई, उसी दिन कॉलेज में आयोजित एक अनिवार्य सेमिनार में उसकी उपस्थिति दर्ज दिखाई गई।
स्वास्थ्य विभाग ने मांगी रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार, सर्जरी विभाग की ओपीडी क्लास में भी आरोपी की उपस्थिति दर्ज की गई थी। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है।
पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. एन. पी. सिंह ने सभी विभागों से छात्रों की उपस्थिति संबंधी जानकारी मांगी है। साथ ही फर्जी हाजिरी से जुड़े आरोपों की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि छात्र की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई और इसमें किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका थी या नहीं।
EOU की जांच से खुल सकते हैं बड़े राज
आर्थिक अपराध इकाई अब तकनीकी साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल डाटा और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक परीक्षा केंद्र या कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं हो सकता।
यदि जांच में बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। साथ ही परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए भी नई सिफारिशें सामने आ सकती हैं।
फिलहाल पूरे मामले पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजर बनी हुई है। EOU की जांच रिपोर्ट से इस कथित घोटाले की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
