20 साल में बदला बिहार का विकास मॉडल, गरीबी घटी, आय 13 गुना बढ़ी; सरकार ने जारी किए बड़े आंकड़े


पटना: बिहार विकास रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार के योजना एवं विकास विभाग ने महत्वपूर्ण आंकड़े जारी किए हैं। विभाग का दावा है कि पिछले दो दशकों में बिहार विकास रिपोर्ट कई सामाजिक और आर्थिक मानकों पर राज्य की उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार मानव विकास, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में बिहार ने तेजी से सुधार किया है। सरकार का कहना है कि राज्य अब केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित विकास नहीं कर रहा, बल्कि मानव विकास और जीवन स्तर सुधार के कई पैमानों पर भी आगे बढ़ रहा है। जारी आंकड़ों में प्रति व्यक्ति आय, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और पोषण से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किए गए हैं।

मानव विकास सूचकांक में दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी

योजना एवं विकास विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2006 में बिहार का मानव विकास सूचकांक (HDI) 0.485 था। वर्ष 2023 तक यह बढ़कर 0.614 पहुंच गया। इस अवधि में राज्य के HDI में लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर इसी अवधि में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विभाग का दावा है कि बिहार ने इस क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। मानव विकास सूचकांक किसी राज्य के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को मापने का प्रमुख पैमाना माना जाता है। इसलिए इस सुधार को राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

गरीबी कम करने में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन

नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार बिहार ने गरीबी कम करने के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2015-16 में राज्य की बहुआयामी गरीबी दर 51.89 प्रतिशत थी। यह 2019-21 में घटकर 33.76 प्रतिशत रह गई। यानी लगभग 18.13 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज हुई। राष्ट्रीय स्तर पर इसी अवधि में गरीबी में 9.89 प्रतिशत अंक की कमी आई थी। इस तुलना में बिहार का प्रदर्शन लगभग दोगुना बताया गया है। सरकार का दावा है कि सामाजिक सुरक्षा और विकास योजनाओं का असर इन आंकड़ों में दिखाई देता है।

20 वर्षों में 13 गुना बढ़ी प्रति व्यक्ति आय

राज्य की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2004 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय केवल 5,780 रुपये थी। वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 76,490 रुपये पहुंच गई है। यानी दो दशकों में प्रति व्यक्ति आय लगभग 13 गुना बढ़ी है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि किसी राज्य की आर्थिक गतिविधियों, निवेश और आय के अवसरों में विस्तार का संकेत मानी जाती है।

विकास योजनाओं पर खर्च में लगातार बढ़ोतरी

सरकार ने विकास योजनाओं पर खर्च बढ़ाने का भी दावा किया है। आंकड़ों के मुताबिक 2005-06 में प्रति व्यक्ति विकास व्यय 1,463 रुपये था। वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 13,279 रुपये हो गया है। इसी अवधि में स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च 14.8 गुना और शिक्षा क्षेत्र पर खर्च 13.2 गुना बढ़ा है। सरकार का मानना है कि सामाजिक क्षेत्र में बढ़े निवेश का असर स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े सूचकांकों में दिखाई दे रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के संकेत

रिपोर्ट के अनुसार बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ी है। वर्ष 2005-06 में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 19.9 था, जो 2023-24 में बढ़कर 81.1 प्रतिशत हो गया। इसके अलावा जन्म के समय औसत जीवन प्रत्याशा भी 64.2 वर्ष से बढ़कर 69.5 वर्ष हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थागत प्रसव में वृद्धि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

बच्चों के पोषण स्तर में भी सुधार

बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े संकेतकों में भी सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया है।  रिपोर्ट के मुताबिक ठिगनापन (Stunting) में 20 प्रतिशत अंक की कमी आई है। वहीं कम वजन वाले बच्चों की संख्या में 20.2 प्रतिशत अंक और क्षीणता (Wasting) में 8.1 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है। सरकार का दावा है कि यह सुधार राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और पोषण कार्यक्रमों के प्रभाव को दर्शाता है।

बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से कम

पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2024 के अनुसार बिहार की बेरोजगारी दर 3 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह राष्ट्रीय औसत 3.2 प्रतिशत से कम बताई गई है। सरकार का कहना है कि विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने से श्रम बाजार में सकारात्मक बदलाव आया है। हालांकि रोजगार की गुणवत्ता और आय स्तर जैसे मुद्दों पर आगे भी लगातार काम करने की जरूरत बनी हुई है।

SDG रैंकिंग में बिहार की मजबूत छलांग

सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के क्षेत्र में भी बिहार ने प्रगति दर्ज की है। स्वच्छ जल और स्वच्छता (SDG-6) के मामले में बिहार 98 अंकों के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहा। वहीं अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण (SDG-3) का स्कोर 2018-19 के 44 से बढ़कर 2023-24 में 67 हो गया। इस सुधार के साथ बिहार 'Aspirant' श्रेणी से निकलकर 'Front Runner' श्रेणी में पहुंच गया है। यह राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

आगे क्या है सरकार का लक्ष्य?

योजना एवं विकास विभाग का कहना है कि आने वाले वर्षों में बिहार को विकास के नए मानकों तक पहुंचाने पर फोकस किया जाएगा। सरकार का दावा है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में जारी प्रयासों से राज्य की विकास गति और तेज होगी। हालांकि इन आंकड़ों की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन जमीनी स्तर पर विकास, रोजगार की गुणवत्ता और नागरिकों की आय में सुधार जैसे मानकों के आधार पर भी किया जाएगा।

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