भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर पर गरमाई सियासत, पप्पू यादव ने सरकार पर साधा निशाना


 भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है। भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला न्याय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। इस बीच सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है, जबकि विपक्ष और कई अन्य नेताओं ने भी निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।

भरत भूषण तिवारी को लेकर पप्पू यादव ने क्या कहा?

पप्पू यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि भरत भूषण तिवारी ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए भरत भूषण तिवारी की तुलना शहीद भगत सिंह से की और कहा कि अंग्रेजों ने भी भगत सिंह का एनकाउंटर नहीं किया था। उनके अनुसार यह घटना कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पप्पू यादव ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

क्या है भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का पूरा मामला?

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी स्थानीय स्तर पर विस्थापितों के अधिकार और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। घटना से पहले उनका पुलिस के साथ बहस का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान भरत भूषण तिवारी ने पुलिस टीम पर गोली चलाई, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई। पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ के दौरान उनके पैर में गोली लगी और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हालांकि, परिजनों और ग्रामीणों का आरोप इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और हथियार भी फेंक दिया था। इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई। इसी दावे को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।

ग्रामीणों का विरोध और सड़क जाम

भरत भूषण तिवारी का शव गांव पहुंचने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने पटना-बक्सर मार्ग को करीब सात घंटे तक जाम रखा और प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बाद में प्रशासन ने परिजनों से बातचीत की और मामले में आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आत्मसमर्पण का वीडियो मौजूद है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।

पुलिस और ग्रामीणों के दावों में क्यों है विवाद?

इस मामले का सबसे बड़ा विवाद आत्मसमर्पण को लेकर है। पुलिस का दावा है कि भरत भूषण तिवारी लगातार फायरिंग कर रहे थे और जवाबी कार्रवाई मजबूरी थी। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने पहले ही हथियार डाल दिया था और उसके बाद भी उन पर गोली चलाई गई। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो का हवाला देते हुए ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि आत्मसमर्पण हो चुका था तो फिर गोली चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

न्यायिक जांच के ऐलान से बढ़ी उम्मीद

घटना के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ने पर सरकार ने न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। अब पूरे मामले की जांच न्यायिक आयोग करेगा। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। न्यायिक जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पुलिस की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप थी या नहीं।

कई नेताओं ने भी उठाए सवाल

इस मामले में केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिन्हा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि न्यायिक जांच की घोषणा के बाद अब पूरे मामले पर सभी की नजर आयोग की रिपोर्ट पर रहेगी। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के दावे अलग-अलग हैं। ऐसे में न्यायिक जांच की रिपोर्ट ही इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।

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