प्रशांत किशोर का बड़ा दांव, बोले- बांकीपुर में BJP का 40 साल पुराना किला तोड़ेंगे


 बांकीपुर उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक एवं सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। उन्होंने साफ कहा है कि भाजपा का 40-45 साल पुराना किला तोड़ने के लिए जो भी करना पड़ेगा, वह करेंगे। हालांकि पार्टी ने अभी तक उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन उनके इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रशांत किशोर पिछले कई दिनों से पटना की बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। व्यापारियों, बुद्धिजीवियों, युवाओं और अलग-अलग सामाजिक वर्गों से मुलाकात कर वे अपनी राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं।

भाजपा के गढ़ में बड़ी चुनौती

पटना शहर की बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्ष 1995 से लगातार इस सीट पर भाजपा जीत दर्ज करती रही है। पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और उनके निधन के बाद उनके पुत्र नितिन नवीन इस सीट से लगातार विधायक चुने जाते रहे। साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी नितिन नवीन ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा कुमारी को लगभग 51 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया था। वहीं जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी को केवल 7,717 वोट मिले थे। ऐसे में यदि प्रशांत किशोर स्वयं मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला पहले की तुलना में कहीं अधिक दिलचस्प हो सकता है।

क्या खुद चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर?

कुछ दिन पहले तक प्रशांत किशोर कहते रहे थे कि उम्मीदवार का फैसला पार्टी करेगी। लेकिन हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि जरूरत पड़ी तो वे स्वयं चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि बांकीपुर में भाजपा का किला तोड़ने के लिए जो भी करना पड़ेगा, वह किया जाएगा। यदि इसके लिए उन्हें खुद चुनाव लड़ना पड़े तो वह भी तैयार हैं। हालांकि जन सुराज पार्टी की ओर से अभी तक आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में अंतिम फैसला पार्टी की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

सीट खाली क्यों हुई?

बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई। भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद वे राज्यसभा पहुंचे और मार्च 2026 में उन्होंने विधायक पद छोड़ दिया। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार खाली हुई सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना आवश्यक है। इसी कारण अक्टूबर 2026 से पहले यहां मतदान होने की संभावना है।

जन सुराज का फोकस क्यों बढ़ा?

जन सुराज पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। इसके बावजूद पार्टी ने संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान को लगातार जारी रखा है। बांकीपुर में कई दिनों से पार्टी अलग-अलग वर्गों के लोगों के साथ बैठकें कर रही है। प्रशांत किशोर स्वयं क्षेत्र में सक्रिय रहकर मतदाताओं से सीधा संवाद कर रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी इस उपचुनाव को अपने राजनीतिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रही है।

त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। एक ओर भाजपा अपने मजबूत संगठन और नए उम्मीदवार के साथ मैदान में उतर सकती है। दूसरी ओर जन सुराज पार्टी प्रशांत किशोर के नेतृत्व में पूरी ताकत लगाने की तैयारी कर रही है। वहीं महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वाम दल भी संयुक्त या अलग उम्मीदवार उतार सकते हैं। ऐसी स्थिति में वोटों का समीकरण पिछले चुनाव की तुलना में काफी अलग दिखाई दे सकता है।

क्यों अहम माना जा रहा है यह उपचुनाव?

यह उपचुनाव कई कारणों से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नितिन नवीन का गृह क्षेत्र होने के कारण भाजपा के लिए यह प्रतिष्ठा का सवाल है। वहीं जन सुराज पार्टी के लिए यह अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने का अवसर बन सकता है। इसके अलावा पिछले विधानसभा चुनाव और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला बड़ा विधानसभा उपचुनाव होगा। इसलिए बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले सभी दल इस सीट के चुनावी समीकरण पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। यदि प्रशांत किशोर खुद चुनाव मैदान में उतरते हैं तो बांकीपुर उपचुनाव राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का केंद्र बन सकता है।

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