राबड़ी आवास विवाद गरमाया, बंगला खाली करने से इनकार पर बढ़ा सियासी संग्राम

 


पटना में चल रहा राबड़ी आवास विवाद अब बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। राबड़ी आवास विवाद उस समय और चर्चा में आ गया जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकारी बंगला खाली करने से साफ इनकार कर दिया। भवन निर्माण विभाग की ओर से नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सरकार का कहना है कि आवास आवंटन नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहा है।

10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास लंबे समय से लालू परिवार का राजनीतिक और पारिवारिक केंद्र रहा है। अब इस बंगले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

क्या है पूरा राबड़ी आवास विवाद?

बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पहले ही बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित कर दिया है। इसके बावजूद वह अभी तक 10 सर्कुलर रोड वाला बंगला खाली नहीं कर पाई हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार भवन निर्माण विभाग ने उन्हें आवास खाली करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि तय अवधि के भीतर आवास खाली नहीं होने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार का कहना है कि बंगले का पुनः आवंटन किया जा चुका है, इसलिए नए आवंटी को उसका अधिकार मिलना चाहिए।

राबड़ी देवी का बयान क्यों बना चर्चा का विषय?

दिल्ली से पटना लौटने के बाद राबड़ी देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि चाहे सरकार फोर्स बुला ले, लेकिन बंगला खाली नहीं किया जाएगा।

उनके इस बयान के बाद मामला और राजनीतिक हो गया। विभिन्न दलों के नेताओं ने इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल आवास का मामला नहीं रह गया है, बल्कि अब यह राजनीतिक प्रतिष्ठा और प्रतीकात्मक संघर्ष का रूप लेता दिख रहा है।

बंगला किसे आवंटित किया गया है?

राज्य सरकार ने 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया है। वह वर्तमान सरकार में मंत्री हैं और दलित समुदाय से आते हैं।

नंदकिशोर राम ने कहा कि उन्हें अभी तक सरकारी आवास नहीं मिला था और नियमों के तहत यह बंगला उन्हें आवंटित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि दलित होने के कारण इस मुद्दे को अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

उनके बयान के बाद राजनीतिक बहस में सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी जुड़ गया है।

पटना पुलिस और प्रशासन की टीम क्यों पहुंची?

राबड़ी देवी द्वारा बंगला खाली करने से इनकार के बाद पटना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम उनके आवास पहुंची।

अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात कर नए आवंटित आवास में स्थानांतरित होने का अनुरोध किया। हालांकि बातचीत के बाद टीम वापस लौट गई और तत्काल किसी कार्रवाई की सूचना नहीं मिली।

इस घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि प्रशासन फिलहाल संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।

आरजेडी और एनडीए आमने-सामने

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इस पूरे मामले को राजनीतिक कदम बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राबड़ी देवी को बदनाम करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है।

आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने आरोप लगाया कि जानबूझकर एक दलित मंत्री को यह आवास आवंटित किया गया ताकि विवाद को अलग दिशा दी जा सके।

वहीं भाजपा और एनडीए के नेताओं का कहना है कि सरकारी आवास किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होता। उनका तर्क है कि आवास आवंटन और पुनः आवंटन तय नियमों के अनुसार किया जाता है।

सरकार और जेडीयू का क्या कहना है?

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि सभी नागरिकों की तरह पूर्व मुख्यमंत्री को भी कानून और नियमों का पालन करना चाहिए।

जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार ने वैकल्पिक आवास उपलब्ध करा दिया है, तब पुराने बंगले को लेकर इतना आग्रह क्यों है।

उन्होंने यह भी कहा कि लालू परिवार के पास निजी संपत्तियों की कोई कमी नहीं है, इसलिए सरकार द्वारा आवंटित नए आवास में स्थानांतरण किया जा सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है 10 सर्कुलर रोड का बंगला?

पटना का 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है।

लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के राजनीतिक दौर से लेकर आरजेडी की कई अहम बैठकों और रणनीतियों का केंद्र यही परिसर रहा है। यही कारण है कि इस आवास को केवल एक सरकारी बंगले के रूप में नहीं, बल्कि एक राजनीतिक पहचान के रूप में भी देखा जाता है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर क्या राबड़ी देवी नए आवास में शिफ्ट होती हैं या फिर मामला आगे प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचता है।

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