बिहार में टेंडर घोटाले और रिश्वतखोरी के आरोपों के बीच दो IAS अधिकारियों को निलंबित किया गया। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हलचल।
बिहार में कथित टेंडर घोटाले को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। टेंडर घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपों में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, IAS योगेश कुमार सागर और IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। यह कार्रवाई चर्चित ठेकेदार रिशु श्री की गिरफ्तारी और उससे जुड़े खुलासों के बाद सामने आई है।
सरकार के इस फैसले ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। जांच एजेंसियां दोनों अधिकारियों और ठेकेदार के बीच कथित वित्तीय लेन-देन तथा सरकारी टेंडरों में अनियमितताओं की जांच कर रही हैं।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?
निलंबित अधिकारियों में 2017 बैच के IAS अधिकारी योगेश कुमार सागर शामिल हैं। वह समाज कल्याण विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले वे बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बुडको) में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
दूसरी ओर, 2014 बैच की IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा जीविका परियोजना की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) के रूप में कार्यरत थीं। राज्य सरकार ने दोनों अधिकारियों को निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय में रहने का निर्देश दिया है।
रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी जांच
मामले की शुरुआत ठेकेदार रिशु श्री के खिलाफ हुई कार्रवाई से जुड़ी बताई जा रही है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने 27 मई को उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी।
जांच के दौरान बड़ी मात्रा में सोना, चांदी के आभूषण, डायमंड ज्वेलरी, नकदी और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद एजेंसियों ने रिशु श्री से पूछताछ की, जिसमें कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदार के बीच कथित सांठगांठ के संकेत मिले, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ा।
योगेश कुमार सागर पर क्या हैं आरोप?
योगेश कुमार सागर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले हैं। उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ से एमबीबीएस की पढ़ाई की और बाद में यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS बने।
जांच एजेंसियों के अनुसार, उन पर ठेकेदार से कथित आर्थिक लाभ लेने के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वर्ष 2024 में उन्होंने अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ यूरोप की यात्रा की थी, जिसमें ऑस्ट्रिया समेत कई देशों का दौरा शामिल था।
आरोप है कि इस यात्रा का खर्च ठेकेदार रिशु श्री ने उठाया था। हालांकि इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
अभिलाषा कुमारी शर्मा भी जांच के दायरे में
अभिलाषा कुमारी शर्मा बिहार के नवादा जिले की रहने वाली हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और प्रशासनिक सेवा में आईं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, उनके खिलाफ भी ठेकेदार से लाभ लेने के आरोपों की जांच की जा रही है। आरोप है कि उनके आवास पर सौंदर्यीकरण और बागवानी संबंधी कार्यों पर हुए खर्च का भुगतान कथित रूप से ठेकेदार द्वारा किया गया था।
इसके अलावा महंगे उपहार प्राप्त करने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
ईडी और अन्य एजेंसियों की नजर
इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) सहित कई जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। अधिकारियों और ठेकेदार के बीच संभावित वित्तीय लेन-देन, मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
सरकार की ओर से फिलहाल निलंबन को प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति के आधार पर और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
बिहार प्रशासन में क्यों अहम है यह कार्रवाई?
दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों का निलंबन बिहार प्रशासन में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। इससे यह संकेत गया है कि भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मामलों पर सरकार सख्त रुख अपनाने के पक्ष में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल सभी पक्षों की भूमिका की जांच जारी है और एजेंसियां सबूत जुटाने में लगी हैं।
