पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव नतीजों के बाद हलचल तेज हो गई है। ममता बनर्जी कालीघाट बैठक में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने साफ कर दिया कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। बुधवार को हुई ममता बनर्जी कालीघाट बैठक में उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि चुनाव परिणामों में बड़े स्तर पर धांधली हुई है। साथ ही उन्होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने का ऐलान भी किया।
कालीघाट स्थित आवास पर हुई इस आपात बैठक में पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक, वरिष्ठ नेता और संगठन से जुड़े प्रमुख चेहरे मौजूद रहे। हालांकि 11 विधायकों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
चुनाव आयोग पर ममता का सीधा हमला
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी लड़ाई भाजपा से ज्यादा चुनाव आयोग से थी। उनका आरोप है कि आयोग की भूमिका निष्पक्ष नहीं रही और कई सीटों पर जनादेश प्रभावित हुआ।
उन्होंने दावा किया कि करीब 100 सीटों पर धांधली हुई है। ममता ने ईवीएम की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को कानूनी रूप से चुनौती देगी।
टीएमसी प्रमुख ने कहा कि जरूरत पड़ी तो मामला अंतरराष्ट्रीय अदालत तक भी ले जाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से ही अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
इस्तीफे से साफ इनकार
बैठक में ममता बनर्जी का रुख काफी आक्रामक दिखाई दिया। उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि हार के बाद निराश होने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, “अगर मुझे हटाना है तो हटा दें, राष्ट्रपति शासन लगाना है तो लगा दें, लेकिन मैं पीछे हटने वाली नहीं हूं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और संगठन को एकजुट रखने की रणनीति का हिस्सा है।
फैक्ट फाइंडिंग टीम करेगी जांच
टीएमसी अब चुनावी हार के कारणों की आंतरिक समीक्षा भी करेगी। ममता बनर्जी ने अगले सप्ताह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फैक्ट फाइंडिंग टीम भेजने का निर्देश दिया है।
ये टीमें चुनाव के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों, संगठन की कमजोरी और स्थानीय स्तर की शिकायतों की जांच करेंगी। पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार टीएमसी अब संगठन को फिर से मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है।
‘गद्दारों’ की सूची बनाने के निर्देश
बैठक में ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष और बगावत के संकेतों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने नेताओं से कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान की जाए।
उन्होंने ऐसे नेताओं की विस्तृत सूची तैयार करने के निर्देश दिए जिन्हें पार्टी के खिलाफ काम करने वाला माना जा रहा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि टीएमसी संगठनात्मक स्तर पर सख्त कदम उठा सकती है।
भाजपा के शपथ ग्रहण पर अलग रणनीति
भाजपा के प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह के दिन टीएमसी ने अलग तरह के विरोध का फैसला किया है। ममता बनर्जी ने निर्देश दिया कि 9 मई को पार्टी कार्यालयों में रवींद्र संगीत बजाया जाएगा।
टीएमसी इसे सांस्कृतिक विरोध के रूप में पेश कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को राजनीतिक संदेश के तौर पर सामने रखा जाएगा।
अभिषेक बनर्जी की बढ़ी भूमिका
बैठक में ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कठिन समय में अभिषेक ने संगठन को संभालने में अहम भूमिका निभाई।
अभिषेक बनर्जी ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे “दीदी” के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांत रहने और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने की अपील की।
इसके साथ ही उन्होंने चुनाव बाद हिंसा से जुड़े मामलों में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सलाह भी दी।
11 विधायकों की गैरमौजूदगी से बढ़ा सस्पेंस
इस अहम बैठक में 11 नवनिर्वाचित विधायक शामिल नहीं हुए। इसके बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे पार्टी के भीतर संभावित असंतोष से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि टीएमसी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आने वाले दिनों में इन विधायकों की राजनीतिक भूमिका पर सबकी नजरें रहेंगी।
बंगाल की राजनीति में बढ़ेगा टकराव?
चुनाव नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ भाजपा नई सरकार बनाने की तैयारी में है, वहीं टीएमसी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर विपक्ष की भूमिका मजबूत करने में जुटी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी लड़ाई और राजनीतिक विरोध दोनों अगले कुछ हफ्तों में और तेज हो सकते हैं।
