‘शिक्षक मशीन नहीं हैं’... जनगणना ड्यूटी पर बिहार सरकार को MLC की खुली चुनौती

 


बिहार में शिक्षकों पर जनगणना कार्य की अतिरिक्त जिम्मेदारी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। Bihar Teacher Census Duty को लेकर तिरहुत स्नातक क्षेत्र के एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी ने सरकार और शिक्षा विभाग पर तीखा हमला बोला है। Bihar Teacher Census Duty के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पहले स्कूल में पढ़ाना पड़ता है और उसके बाद उन्हें जनगणना जैसे फील्ड कार्यों में लगाया जा रहा है। खासकर महिला शिक्षकों पर इसका असर ज्यादा पड़ रहा है। उन्होंने इसे शिक्षकों पर “डबल ड्यूटी” का दबाव बताते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

महिला शिक्षकों की परेशानी पर उठाए सवाल

Banshidhar Brajwasi ने कहा कि बिहार में 60 प्रतिशत से अधिक महिला शिक्षक कार्यरत हैं।

उनका कहना है कि महिला शिक्षकों को पहले से घर और स्कूल दोनों की जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में जनगणना जैसे अतिरिक्त कार्य उनके लिए परेशानी बढ़ाने वाले हैं।

एमएलसी ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को गंभीरता से नहीं समझ रही है।

उन्होंने कहा कि लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां देने से शिक्षकों की कार्यक्षमता और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

सुबह 4 बजे से शुरू हो जाता है दिन

एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी ने कहा कि कई स्कूलों में मॉर्निंग शिफ्ट चल रही है।

ऐसे में महिला शिक्षकों को सुबह 4 बजे उठना पड़ता है। घर के काम निपटाने के बाद उन्हें सुबह 6:30 बजे तक स्कूल पहुंचना होता है।

पूरा दिन पढ़ाने के बाद शिक्षकों को जनगणना के काम में भी लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों को पर्याप्त आराम तक नहीं मिल पा रहा।

यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

तेज धूप और लंबी दूरी की ड्यूटी

एमएलसी ने कहा कि स्कूल की ड्यूटी खत्म होने के बाद शिक्षकों को तेज धूप में फील्ड में जाकर जनगणना करनी पड़ रही है।

उन्होंने दावा किया कि कई शिक्षकों को 25-25 किलोमीटर दूर तक ड्यूटी दी जा रही है।

इससे आने-जाने में समय और ऊर्जा दोनों खर्च हो रही हैं। ग्रामीण इलाकों में काम करने के दौरान सुरक्षा और सुविधाओं की कमी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति खासतौर पर महिला शिक्षकों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण बन रही है।

श्रम कानून और अधिकारों पर उठाए सवाल

बंशीधर ब्रजवासी ने सरकार से पूछा कि आखिर किस श्रम कानून के तहत शिक्षकों पर इतना अतिरिक्त दबाव डाला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों और कार्य परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

एमएलसी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों को सहयोग और सम्मान की जरूरत है, अतिरिक्त बोझ की नहीं।

उन्होंने सरकार से जनगणना कार्य के लिए अलग व्यवस्था करने की मांग भी उठाई।

ACS पर साधा निशाना

एमएलसी ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव यानी ACS पर भी सीधा हमला बोला।

उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि व्यवस्था इतनी आसान है तो अधिकारी खुद एक प्रगणक क्षेत्र लेकर जनगणना कर दिखाएं।

उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए भुगतान भी करेगी और वे खुद अतिरिक्त एक लाख रुपये देने को तैयार हैं।

इस बयान के बाद बिहार की राजनीति और शिक्षा जगत में नई चर्चा शुरू हो गई है।

शिक्षकों की समस्याओं को लेकर बढ़ रही बहस

बिहार में पिछले कुछ समय से शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर लगातार बहस होती रही है।

स्कूल शिक्षा के अलावा चुनाव, जनगणना और अन्य सरकारी कार्यों में भी शिक्षकों की तैनाती की जाती रही है।

शिक्षक संगठनों का भी कहना रहा है कि इससे पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षकों पर लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ता रहा तो इसका असर छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी है कि शिक्षक पूरी ऊर्जा और समय पढ़ाने में दे सकें।

वहीं प्रशासनिक जरूरतों और जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्यों के लिए भी पर्याप्त मानव संसाधन की आवश्यकता होती है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और शिक्षकों की मांगों पर कोई फैसला लेती है या नहीं।

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