गांवों में जमीन पर बड़ा झटका: 46% परिवार भूमिहीन, 10% के पास आधी जमीन

 


भारत जैसे कृषि प्रधान देश में ग्रामीण भारत भूमि असमानता पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 2026 में जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत के गांवों में 46% परिवार भूमिहीन हैं, जबकि सिर्फ 10% परिवारों के पास 44% जमीन है। वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब द्वारा किए गए इस अध्ययन में 65 करोड़ लोगों और 2.7 लाख गांवों के डेटा का विश्लेषण किया गया। यह रिपोर्ट दिखाती है कि ग्रामीण भारत भूमि असमानता क्यों बढ़ रही है और इसका असर समाज पर कैसे पड़ रहा है।

यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत को लंबे समय से कृषि प्रधान देश माना जाता रहा है, जहां बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है।


गांवों में जमीन का असमान बंटवारा

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण भारत में जमीन का वितरण बेहद असंतुलित है।

  • शीर्ष 10% परिवारों के पास 44% कृषि भूमि
  • शीर्ष 5% के पास 32% जमीन
  • शीर्ष 1% के पास 18% जमीन
  • जबकि 46% परिवार पूरी तरह भूमिहीन

इसका मतलब साफ है कि आधे से ज्यादा ग्रामीण परिवारों के पास खेती के लिए अपनी जमीन ही नहीं है।

कुछ गांवों में तो स्थिति और भी गंभीर है, जहां एक ही व्यक्ति आधे से ज्यादा कृषि भूमि पर कब्जा रखता है।


2.7 लाख गांवों के डेटा से खुलासा

यह अध्ययन अर्थशास्त्रियों नितिन कुमार भारती, डेविड ब्लेकस्ली और समरीन मलिक द्वारा किया गया है।

उन्होंने 2.7 लाख गांवों और करीब 65 करोड़ लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया।

रिपोर्ट में बताया गया कि भूमि असमानता का गिनी सूचकांक 71 तक पहुंच गया है, जो बेहद उच्च स्तर की असमानता को दर्शाता है।

इसका सीधा मतलब है कि जमीन का वितरण समाज में समान रूप से नहीं हुआ है।


राज्यों के बीच भी बड़ा अंतर

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अलग-अलग राज्यों में भूमि असमानता का स्तर अलग है।

  • दक्षिण भारत के कई राज्यों में असमानता कम है
  • कृषि के लिए अनुकूल क्षेत्रों में जमीन का केंद्रीकरण ज्यादा है
  • ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश शासन वाले क्षेत्रों में असमानता अधिक पाई गई

वहीं, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भूमि सुधार नीतियों के कारण यह अंतर अपेक्षाकृत कम दिखता है।


सामाजिक संरचना का गहरा असर

भूमि स्वामित्व पर सामाजिक संरचना का भी बड़ा प्रभाव देखने को मिला है।

  • अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वाले गांवों में भूमिहीनता ज्यादा
  • सामाजिक असमानता के कारण जमीन का वितरण प्रभावित
  • बाजार और बुनियादी ढांचे तक पहुंच के बावजूद असमानता बनी हुई

इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक कारण भी इस समस्या को गहरा बना रहे हैं।


आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की सच्चाई को सामने लाती है।

इस फैसले से लोगों को सबसे बड़ा असर आजीविका पर पड़ता है।

  • भूमिहीन परिवार मजदूरी पर निर्भर रहते हैं
  • आय अस्थिर होती है
  • गरीबी और सामाजिक असमानता बढ़ती है
  • खेती से जुड़े अवसर सीमित हो जाते हैं

ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं, जिससे पलायन बढ़ सकता है।


क्यों बढ़ रही है भूमि असमानता?

रिपोर्ट के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं:

  • ऐतिहासिक भूमि वितरण की असमानता
  • सामाजिक भेदभाव
  • बाजार तक सीमित पहुंच
  • भूमि सुधार नीतियों का असमान प्रभाव
  • प्राकृतिक संसाधनों की असमान उपलब्धता

इन सभी कारकों ने मिलकर आज की स्थिति को जन्म दिया है।


आगे क्या हो सकता है समाधान?

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समस्या से निपटने के लिए:

  • प्रभावी भूमि सुधार नीतियां लागू करनी होंगी
  • छोटे किसानों को समर्थन देना होगा
  • ग्रामीण रोजगार के नए अवसर पैदा करने होंगे
  • सामाजिक असमानता को कम करने पर ध्यान देना होगा

यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह असमानता और बढ़ सकती है।


Source: भाषा / World Inequality Lab Report

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