
बंगाल में ‘नौकरी कार्ड’ से बीजेपी का बड़ा दांव
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बीजेपी ने बड़ा दांव खेलते हुए ‘नौकरी कार्ड’ को केंद्र में ला दिया है। हावड़ा में रैली के दौरान बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने 5 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया। बंगाल चुनाव 2026 में बीजेपी ने ‘बिहार मॉडल’ का हवाला देकर युवाओं को साधने की रणनीति अपनाई है। यह कदम तब आया जब राज्य में बेरोजगारी और भर्ती विवाद बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
हावड़ा से शुरू हुआ ‘नौकरी कार्ड’ का नया अभियान
हावड़ा की रैली में सम्राट चौधरी ने सीधे युवाओं को लक्ष्य बनाते हुए रोजगार को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार बनते ही 5 लाख सरकारी नौकरियां दी जाएंगी।
उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां ‘डबल इंजन सरकार’ के तहत 11.5 लाख नौकरियां दी गईं। इसी मॉडल को अब बंगाल में लागू करने की बात कही जा रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में युवाओं के बीच नौकरी और भविष्य को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
क्यों बीजेपी अपना रही है ‘बिहार मॉडल’?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बीजेपी की यह रणनीति सोची-समझी है। इसके पीछे कई अहम कारण हैं:
1. पलायन का मुद्दा:
बंगाल के कई युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। ऐसे में बिहार में बड़े पैमाने पर हुई नियुक्तियों का उदाहरण प्रभाव डाल सकता है।
2. भर्ती घोटालों पर हमला:
राज्य में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर सरकार पहले से दबाव में है। बीजेपी पारदर्शिता का मुद्दा उठाकर इसे चुनावी हथियार बना रही है।
3. भौगोलिक और सामाजिक जुड़ाव:
बिहार और बंगाल पड़ोसी राज्य हैं। दोनों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत हैं, जिससे बिहार की नीतियों का असर बंगाल के मतदाताओं पर पड़ सकता है।
‘डबल इंजन’ बनाम स्थानीय मुद्दों की राजनीति
सम्राट चौधरी ने अपने भाषण में बार-बार ‘डबल इंजन सरकार’ का जिक्र किया। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने से विकास की रफ्तार तेज होती है।
इस बार बीजेपी का फोकस केवल पारंपरिक मुद्दों पर नहीं, बल्कि विकास और रोजगार पर भी है। यह रणनीति बदलाव का संकेत देती है, जिसमें पार्टी ‘डिलीवरी मॉडल’ को सामने रख रही है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस इस वादे को चुनावी जुमला बता रही है और स्थानीय विकास कार्यों को ही अपनी ताकत बता रही है।
युवाओं के लिए क्या मायने रखता है यह वादा?
बंगाल के औद्योगिक क्षेत्रों, खासकर हावड़ा में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है। ऐसे में 5 लाख नौकरियों का वादा सीधे युवाओं को प्रभावित कर सकता है।
इस फैसले से लोगों को उम्मीद और संशय दोनों मिला है।
जहां एक तरफ रोजगार की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर लोग यह जानना चाहते हैं कि यह वादा कितना वास्तविक है।
युवाओं के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बिहार जैसा मॉडल बंगाल में भी सफल हो सकता है।
चुनावी समीकरण पर क्या होगा असर?
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मुद्दा चुनावी बहस को नई दिशा दे सकता है। अब चुनाव केवल पहचान या क्षेत्रीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजगार और विकास जैसे विषय केंद्र में आ सकते हैं।
बीजेपी की रणनीति स्पष्ट है—वह ‘काम और वादे’ के संतुलन के साथ मतदाताओं को आकर्षित करना चाहती है। वहीं टीएमसी अपने पुराने जनाधार और योजनाओं पर भरोसा कर रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘नौकरी कार्ड’ कितना असर डालता है।
Source: News18 Hindi