इजरायल का बड़ा कदम, सीजफायर पर संकट! लेबनान में तबाही से दुनिया चिंतित

 


सीजफायर पर संकट! लेबनान में तबाही से दुनिया चिंतित

इजरायल लेबनान हमला ने एक बार फिर मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है। बुधवार को सीजफायर के महज 24 घंटे बाद इजरायल ने लेबनान के कई इलाकों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इन हमलों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इजरायल का कहना है कि यह हमला हिज्बुल्लाह के खिलाफ था और लेबनान सीजफायर का हिस्सा नहीं है। वहीं, अमेरिका-ईरान के बीच हुए युद्धविराम पर अब सवाल उठने लगे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल दिया है।


इजरायल के हमलों से सीजफायर पर क्यों संकट?

सीजफायर की घोषणा के तुरंत बाद इजरायल का लेबनान पर हमला कई देशों के लिए चौंकाने वाला रहा। इजरायल ने साफ कहा कि लेबनान इस समझौते में शामिल नहीं है, इसलिए कार्रवाई जारी रहेगी।

महज 10 मिनट के भीतर 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह हमला हाल के महीनों में सबसे बड़ा माना जा रहा है।

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रुके, तो वह सीधे जवाबी कार्रवाई करेगा। इससे संघर्ष और बढ़ने की आशंका है।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी आलोचना

इजरायल के इस कदम की दुनियाभर में आलोचना हो रही है। इटली ने नागरिकों पर हो रही बमबारी को अस्वीकार्य बताया है। वहीं ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने इसे “गंभीर रूप से नुकसानदेह” करार दिया।

संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा कि ये हमले अमेरिका-ईरान सीजफायर को कमजोर कर सकते हैं और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों का मानना है कि युद्धविराम लेबनान पर भी लागू होना चाहिए।


लेबनान में तबाही का भयावह मंजर

लेबनान के कई शहरों में भारी तबाही देखी जा रही है। बेरूत और अल-हर्मेल जैसे इलाकों में बमबारी से इमारतें ध्वस्त हो गईं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस तबाही की गंभीरता दिखा रहे हैं। एक वीडियो में डरी हुई बच्ची “पापा-पापा” चिल्लाते हुए भागती नजर आ रही है।

पिछले छह हफ्तों में 1500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 130 बच्चे भी शामिल हैं। लाखों लोग बेघर हो गए हैं।


पुरानी दुश्मनी और बढ़ता तनाव

इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष नया नहीं है। 1982 और 2006 में दोनों के बीच बड़े युद्ध हो चुके हैं।

इजरायल का दावा है कि यह हमला हिज्बुल्लाह के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। वहीं हिज्बुल्लाह को ईरान का समर्थन प्राप्त है, जिससे यह संघर्ष और जटिल हो गया है।

ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका से साफ कहा है कि उसे तय करना होगा—या तो सीजफायर लागू करे या युद्ध जारी रखे।


क्या टूट जाएगा सीजफायर?

मौजूदा हालात को देखते हुए सीजफायर कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। इजरायल और अमेरिका का कहना है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है, जबकि ईरान और अन्य देश इससे असहमत हैं।

अगर इजरायल ने हमले नहीं रोके, तो ईरान की सीधी एंट्री से बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। ऐसे में अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका पर टिकी है।


आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले से लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। आम नागरिकों की जान जा रही है और लाखों लोग बेघर हो रहे हैं।

अगर संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर भी पड़ेगा—तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार अस्थिर हो सकता है।


Source: अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स

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