
क्या हुआ, कब और कहां?
लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए ताजा हमले में हिज्बुल्लाह से जुड़े एक बड़े चेहरे की मौत हो गई है। इजरायली सेना के मुताबिक, यह हमला हाल ही में किया गया, जिसमें हिज्बुल्लाह चीफ के करीबी और पर्सनल सेक्रेटरी अली यूसुफ हर्शी मारे गए। बेरूत हमला लगातार बढ़ते तनाव के बीच हुआ, जहां बेरूत हमला सीजफायर के बावजूद जारी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा बताया जा रहा है। इजरायल का कहना है कि उसने यह कार्रवाई हिज्बुल्लाह नेटवर्क को कमजोर करने के लिए की।
बेरूत हमले में कौन मारा गया?
इजरायली सेना ने दावा किया है कि अली यूसुफ हर्शी, जो हिज्बुल्लाह चीफ नईम कासिम के भतीजे और पर्सनल सेक्रेटरी थे, इस हमले में मारे गए।
हर्शी संगठन के भीतर बेहद प्रभावशाली माने जाते थे। वे न केवल प्रशासनिक काम देखते थे, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक फैसलों में भी उनकी भूमिका अहम थी।
इजरायल का कहना है कि यह हमला एक “टारगेटेड ऑपरेशन” था, जिसका मकसद संगठन के नेतृत्व को कमजोर करना था।
सीजफायर के बावजूद क्यों जारी है हमला?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर समझौते के बावजूद लेबनान में हिंसा थमती नजर नहीं आ रही।
इजरायल और अमेरिका का कहना है कि यह सीजफायर केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित था और इसमें लेबनान शामिल नहीं था।
यही वजह है कि इजरायली सेना लगातार हिज्बुल्लाह ठिकानों पर हमले कर रही है।
पिछले कुछ दिनों में बेरूत समेत कई इलाकों में बड़े स्तर पर एयरस्ट्राइक और जमीनी ऑपरेशन देखे गए हैं।
हिज्बुल्लाह का जवाबी हमला
इजरायल के हमलों के बाद हिज्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है।
गुरुवार, 9 अप्रैल को संगठन ने दावा किया कि उसने इजरायल के मनारा क्षेत्र में रॉकेट दागे हैं।
हिज्बुल्लाह ने इसे सीजफायर उल्लंघन का जवाब बताया और कहा कि उसे अपनी रक्षा का पूरा अधिकार है।
इससे साफ है कि दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और संघर्ष और बढ़ सकता है।
अब तक कितनी हुई तबाही?
लेबनान में इस संघर्ष ने गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 1500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों लोग घायल हैं और बड़ी संख्या में नागरिक विस्थापित हो चुके हैं।
यह पिछले 30 वर्षों में लेबनान पर सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है।
आम लोगों पर क्या असर?
इस बढ़ते संघर्ष का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
लगातार हमलों की वजह से लोगों में डर और असुरक्षा बढ़ गई है। बिजली, पानी और जरूरी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
इस फैसले से लोगों को राहत मिलने के बजाय मुश्किलें और बढ़ती दिख रही हैं, क्योंकि सीजफायर के बावजूद हिंसा थमने के संकेत नहीं मिल रहे।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात और भी गंभीर हो गए हैं।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
इजरायल और हिज्बुल्लाह दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
Source: अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक बयान