तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो – भक्ति प्रार्थना का अर्थ

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥

तुम ही हो साथी, तुम ही सहारे । कोई ना अपना सिवा तुम्हारे ॥

तुम ही हो साथी, तुम ही सहारे । कोई ना अपना सिवा तुम्हारे ॥

तुम ही हो नईया, तुम ही खिवईया । तुम ही हो बंधू, सखा तुम ही हो ॥

तुम ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥

जो खिल सके ना वो फूल हम हैं । तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं ॥

जो खिल सके ना वो फूल हम हैं । तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं ॥

दया की दृष्टि, सदा ही रखना । तुम ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥

🌼 सारांश: “तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो” एक प्रसिद्ध भक्ति-प्रार्थना है, जिसमें ईश्वर को जीवन का सर्वस्व माना गया है। यह प्रार्थना पूर्ण समर्पण, विश्वास और आस्था का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि ईश्वर ही हमारे जीवन के मार्गदर्शक, रक्षक और सच्चे मित्र हैं।
🎵 किसने गाया: इसे कई प्रसिद्ध गायकों ने गाया, खासकर भजन गायक अनूप जलोटा का संस्करण बहुत लोकप्रिय है। स्कूल प्रार्थनाओं और भजन कार्यक्रमों में सामूहिक रूप से भी गाया जाता है।
✍️ किसने लिखा: यह प्रार्थना पारंपरिक संस्कृत श्लोक “त्वमेव माता च पिता त्वमेव” से प्रेरित है। इसका सटीक रचयिता ज्ञात नहीं है और इसे पारंपरिक स्तुति के रूप में स्वीकार किया जाता है।
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