वंदे मातरम्: राष्ट्रीय गीत का अर्थ, इतिहास और महत्व

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वन्दे मातरम्

छंद 1: वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्। शस्यशामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं। फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं। सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं। सुखदां वरदां मातरम्।। वन्दे मातरम्।।

छंद 2: वन्दे मातरम्। कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले। कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले। अबला केन मा एत बले। बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं। रिपुदलवारिणीं मातरम्। वन्दे मातरम्।।

छंद 3: वन्दे मातरम्। तुमि विद्या, तुमि धर्म। तुमि हृदि, तुमि मर्म। त्वं हि प्राणाः शरीरे। बाहुते तुमि मा शक्ति। हृदये तुमि मा भक्ति। तोमारई प्रतिमा गडि। मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।। वन्दे मातरम्।।

छंद 4: वन्दे मातरम्। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी। कमला कमलदलविहारिणी। वाणी विद्यादायिनी। नमामि त्वाम्। नमामि कमलां अमलां अतुलां। सुजलां सुफलां मातरम्।। वन्दे मातरम्।।

छंद 5: वन्दे मातरम्। श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां। धरणीं भरणीं मातरम्। शत्रु-दल-वारिणीं। मातरम्।। वन्दे मातरम्।।

छंद 6: वन्दे मातरम्। त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति। त्वं हि शक्ति मातरम्। वन्दे मातरम्।।

“वंदे मातरम्” भारत का राष्ट्रीय गीत है। इसे महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास आनंदमठ में लिखा था। यह गीत स्कूलों, सभाओं और सामाजिक कार्यक्रमों में आज भी बड़े भाव से गाया जाता है।
🌟 समग्र संदेश: यह गीत हमें अपनी मातृभूमि से प्रेम करने, उसकी रक्षा करने और उसके सम्मान को बनाए रखने की प्रेरणा देता है। इसमें देशभक्ति, त्याग और एकता का संदेश निहित है।
केंद्र सरकार ने 'वन्दे मातरम्' के गायन और वादन को लेकर जरूरी दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब ऑफिशियल प्रोग्राम्स पर वन्दे मातरम् के छह अंतरा वाले संस्करण बजाना या गाना अनिवार्य होगा। यह तय समय यानी 3 मिनट 10 सेकंड होना चाहिए।
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