पटना में बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सोमवार (2 मार्च 2026) को केंद्रीय मंत्री Giriraj Singh ने Tejashwi Yadav के संभावित राज्यसभा चुनाव लड़ने की चर्चा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “हमें मालूम हुआ है कि युवराज ही जाना चाहते हैं, अब यहां से मन ऊब गया है, अच्छा है लड़कर देख लें।” बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में पांच सीटों के लिए मतदान होना है, जिनमें चार पर एनडीए मजबूत दिख रहा है, जबकि एक सीट पर सस्पेंस बरकरार है।
महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव के नाम की चर्चा चल रही है, हालांकि अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
गिरिराज सिंह का बयान क्यों चर्चा में?
गिरिराज सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि तेजस्वी यादव राज्यसभा जाना चाहते हैं। उनका तंज था कि “अब यहां से मन ऊब गया है, अच्छा है चुनाव लड़कर भी देख लें।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब आरजेडी ने रविवार (1 मार्च 2026) को अपनी पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक की थी। बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर मंथन हुआ।
हालांकि गिरिराज सिंह ने यह भी संकेत दिया कि अंतिम फैसला जनता और संख्या बल तय करेगा।
आरजेडी की बैठक में क्या हुआ?
राष्ट्रीय जनता दल ने अपने संसदीय बोर्ड की बैठक में उम्मीदवार चयन का अधिकार पार्टी नेतृत्व को सौंपा। पार्टी प्रमुख Lalu Prasad Yadav और तेजस्वी यादव को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है।
बैठक में यह भी तय हुआ कि जो भी प्रत्याशी होगा, वह 5 मार्च 2026 को नामांकन करेगा। इससे पहले उम्मीदवार के नाम पर सस्पेंस बना रहेगा।
तेजस्वी यादव के नाम की चर्चा जरूर है, लेकिन पार्टी की ओर से अभी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जेडीयू और एनडीए की प्रतिक्रिया
जेडीयू प्रवक्ता Neeraj Kumar ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आरजेडी के अंदर अंतिम निर्णय संसदीय बोर्ड करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का भी है।
एनडीए का दावा है कि बहुमत के आधार पर चार सीटें उसके खाते में जाती दिख रही हैं। पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव 2026 का गणित
बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए आवश्यक वोटों की संख्या तय है।
मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास स्पष्ट बढ़त है। इसलिए चार सीटों पर उसकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
पांचवीं सीट पर महागठबंधन की रणनीति और संभावित अतिरिक्त समर्थन परिणाम तय कर सकता है।
यही कारण है कि तेजस्वी यादव के नाम को लेकर चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है।
गिरिराज का राहुल गांधी पर हमला
गिरिराज सिंह ने बयान के दौरान Rahul Gandhi पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “राहुल गांधी नकली गांधी परिवार के युवराज हैं, जो जिसे चाहें पार्टी में रखें या निकाल दें।”
उन्होंने तेजस्वी यादव को भी “लालू का युवराज” बताते हुए टिप्पणी की कि ये दल लोकतांत्रिक नहीं हैं।
हालांकि इन बयानों पर विपक्षी दलों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा?
नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च 2026 है। उसके बाद तस्वीर और साफ होगी कि आरजेडी किसे मैदान में उतारती है।
यदि तेजस्वी यादव उम्मीदवार बनते हैं, तो यह उनके राजनीतिक करियर का नया अध्याय होगा। वहीं यदि कोई अन्य नाम सामने आता है, तो भी यह चुनाव सियासी दृष्टि से अहम रहेगा।
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में बयानबाजी और रणनीति दोनों चरम पर हैं। अब नजर आधिकारिक घोषणा और नामांकन प्रक्रिया पर टिकी है।
राजनीति में हर चुनाव केवल सीटों का खेल नहीं होता, बल्कि संदेश और समीकरण भी तय करता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह मुकाबला कितना कड़ा होता है और किसके पक्ष में जाता है।
Source: एजेंसी रिपोर्ट्स व पटना में राजनीतिक बयान (2 मार्च 2026)
