बिहार के गोपालगंज जिले में Gopalganj Bridge Collapsed की घटना ने एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार को सिधवलिया प्रखंड के गंगवा गांव में घोघारी नदी पर बन रहा आरसीसी पुल ढलाई के बाद अचानक गिर गया। करीब 2.89 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल के एक स्पैन के गिरने के बाद प्रशासन हरकत में आया। Gopalganj Bridge Collapsed की सूचना मिलते ही डीएम मौके पर पहुंचे और स्वतंत्र जांच के आदेश दिए। फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटिया सामग्री और कमजोर सरिया के कारण हादसा हुआ। प्रशासन ने तकनीकी टीम गठित कर जांच शुरू कर दी है।
कहां और कैसे हुआ हादसा?
यह पुल सिधवलिया प्रखंड के गंगवा गांव में घोघारी नदी पर बन रहा था। कुल लंबाई लगभग 29 मीटर थी और इसे दो स्पैन में तैयार किया जा रहा था।
पहला स्पैन पहले से तैयार था। दूसरे स्पैन की ढलाई हाल ही में की गई थी। इसी दौरान शटरिंग गिरने से ताजा ढला हिस्सा ध्वस्त हो गया।
घटना रविवार शाम की बताई जा रही है। हादसे के वक्त वहां मजदूर मौजूद थे, हालांकि किसी बड़े जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।
निर्माण एजेंसी और लागत
पुल का निर्माण मोतिहारी की बापूधाम कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही थी। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2 करोड़ 89 लाख रुपये थी।
यह पुल ग्रामीण इलाकों को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था। इसके पूरा होने से आवागमन आसान होना था।
घटना के बाद निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि काम की गुणवत्ता पहले से ही संदेह के घेरे में थी।
ग्रामीणों का आरोप क्या है?
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया सामग्री और कमजोर सरिया का उपयोग किया गया। उनका कहना है कि ढलाई के समय ही संरचना में कमजोरी दिखने लगी थी।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
लोगों का कहना है कि बार-बार पुल गिरने की घटनाएं जनता के भरोसे को कमजोर करती हैं।
डीएम ने क्या कहा?
घटना की सूचना मिलते ही गोपालगंज के डीएम सोमवार को मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि रविवार शाम सूचना मिली थी और सिधवलिया सीओ से पुष्टि कराई गई।
डीएम के अनुसार, “दो स्पैन का पुल बन रहा था। एक पहले से ढला हुआ था। दूसरे की ढलाई के बाद शटरिंग गिरने से पुल का हिस्सा ध्वस्त हुआ।”
उन्होंने यह भी कहा कि एक जांच टीम बनाई गई है, जिसमें एक चीफ इंजीनियर को अध्यक्ष बनाया गया है। टीम स्वतंत्र रूप से पूरे मामले की जांच करेगी।
जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया
डीएम ने स्पष्ट किया कि बार-बार पुल गिरने की घटनाएं गंभीर विषय हैं। उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षण में कमी होने पर संबंधित पदाधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी।
फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी ऑडिट से यह स्पष्ट होगा कि हादसा डिजाइन की त्रुटि, सामग्री की गुणवत्ता या निगरानी की कमी के कारण हुआ।
पुल गिरने की घटनाएं क्यों बढ़ रहीं?
बिहार में पिछले कुछ वर्षों में निर्माणाधीन पुलों के गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में अक्सर गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी प्रणाली पर सवाल उठते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में समय सीमा और लागत का दबाव भी एक कारण माना जाता है। लेकिन तकनीकी मानकों से समझौता करना गंभीर जोखिम पैदा करता है।
यह घटना भी इसी व्यापक बहस का हिस्सा बन गई है।
आगे क्या होगा?
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसे की असली वजह क्या थी। यदि निर्माण में लापरवाही साबित होती है, तो एजेंसी पर कार्रवाई संभव है।
ग्रामीणों की मांग है कि दोबारा निर्माण शुरू करने से पहले गुणवत्ता की पूरी जांच हो।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
गोपालगंज में निर्माणाधीन पुल गिरने की यह घटना केवल एक परियोजना की विफलता नहीं, बल्कि निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल भी है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है।
Source: स्थानीय प्रशासनिक बयान व जिला अधिकारियों की जानकारी
