पटना में बिहार राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। इस महीने होने वाले बिहार राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एनडीए को सीधी चुनौती देने का फैसला किया है। लालू प्रसाद यादव के आवास पर हुई संसदीय बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया। संख्या बल कम होने के बावजूद पार्टी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पांच सीटों पर होने वाले चुनाव में पांचवीं सीट को लेकर खास रणनीति बन रही है। नामांकन की अंतिम तारीख 6 मार्च तय है।
राजनीतिक हलकों में इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। अब मुकाबला केवल गणित का नहीं, बल्कि रणनीति और गठबंधन प्रबंधन का भी है।
RJD ने क्यों लिया चुनाव लड़ने का फैसला?
RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने बैठक के बाद कहा कि पार्टी चुनाव जरूर लड़ेगी। केंद्रीय और राज्य संसदीय बोर्ड ने राष्ट्रीय अध्यक्ष और तेजस्वी यादव को अंतिम निर्णय का अधिकार दिया है।
वरिष्ठ नेता कांति सिंह ने भी साफ कहा कि संख्या बल कम होने के बावजूद पार्टी पीछे नहीं हटेगी। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में मुकाबला होना चाहिए, वॉकओवर नहीं।
हालांकि उम्मीदवार के नाम पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। तेजस्वी यादव के संभावित उम्मीदवार होने की चर्चा पर नेताओं ने सीधा जवाब नहीं दिया।
3 और 6 वाला गेम क्या है?
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में राज्यसभा सीट जीतने के लिए न्यूनतम 41 विधायकों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है।
RJD के पास फिलहाल 25 विधायक हैं। कांग्रेस और वाम दलों के साथ महागठबंधन की संयुक्त संख्या करीब 35 तक पहुंचती है। यानी जीत के लिए उन्हें लगभग 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।
दूसरी ओर, एनडीए के पास मजबूत संख्या बल है। उसे पांचवीं सीट सुरक्षित करने के लिए केवल 3 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए।
यही “3 और 6” का गेम इस चुनाव को रोचक बना रहा है।
AIMIM और BSP पर टिकी निगाहें
RJD की नजर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पर है, जिसके पास पांच विधायक हैं। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी (BSP) का एक विधायक भी अहम भूमिका निभा सकता है।
AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी भी सक्रिय भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि दूसरे दल भी उनका समर्थन करें।
यदि ये वोट महागठबंधन के पक्ष में जाते हैं, तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
NDA की रणनीति और दावेदारी
एनडीए को भरोसा है कि वह सभी पांच सीटें जीत सकता है। भाजपा और जदयू की दो-दो सीटों पर स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
भाजपा सूत्रों के अनुसार उम्मीदवारों का चयन केंद्रीय नेतृत्व करेगा। कुछ नामों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल रही है, लेकिन आधिकारिक घोषणा बाकी है।
जदयू की दो सीटों को बरकरार रखने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि उम्मीदवारों के नाम को लेकर अंतिम फैसला अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
उपेंद्र कुशवाहा और सहयोगी दलों की स्थिति
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पास एक सीट है। उनकी पार्टी एनडीए की छोटी सहयोगी है और विधानसभा में चार विधायक हैं।
यदि एनडीए रणनीतिक बदलाव करता है, तो इस सीट को लेकर भी नई चर्चाएं शुरू हो सकती हैं। सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाए रखना गठबंधन के लिए अहम रहेगा।
चिराग पासवान का बयान
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन परिणाम तय है।
उनका दावा है कि एनडीए सभी पांच सीटें जीतने की स्थिति में है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी गठबंधन में दरार से एनडीए को फायदा मिल सकता है।
आगे की राह
6 मार्च नामांकन की अंतिम तारीख है। इसके बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का भी है। RJD के लिए यह अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का अवसर है, जबकि NDA के लिए संख्या बल साबित करने की चुनौती।
संख्या, रणनीति और समर्थन—इन तीन कारकों पर ही बिहार राज्यसभा चुनाव का परिणाम तय होगा।
Source: एजेंसी रिपोर्ट्स व पटना में राजनीतिक बयान
