बिहार के बेतिया में सामने आया बेतिया इंजीनियर घूसकांड अब बड़ा खुलासा बन चुका है। सोमवार रात बेतिया में शिक्षा विभाग के सहायक अभियंता रौशन कुमार को स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने 5 लाख रुपये की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। छापेमारी के दौरान बेतिया इंजीनियर घूसकांड में उसके घर से कुल 47 लाख रुपये नकद बरामद हुए। विजिलेंस टीम को शुरुआत में सिर्फ 5 लाख रुपये की टिप मिली थी, लेकिन तलाशी में नोटों का अंबार सामने आया।
डीएसपी सुधीर कुमार के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। देर रात तक नोटों की गिनती चलती रही और मशीन से गिनने के बाद कुल रकम 47 लाख रुपये निकली।
कैसे खुला पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SUV) को 5 लाख रुपये घूस लेने की सूचना मिली थी। इसी आधार पर ट्रैप बिछाया गया।
सोमवार रात टीम ने रौशन कुमार को कथित रूप से घूस लेते पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद नियमानुसार उसके घर की तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान अलमारी, दराज और अन्य जगहों से नोटों की गड्डियां मिलने लगीं। कैश की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि टीम को नोट गिनने की मशीन मंगवानी पड़ी।
5 लाख की टिप, लेकिन निकले 47 लाख
डीएसपी सुधीर कुमार के अनुसार शुरुआती कार्रवाई 5 लाख रुपये की घूस को लेकर थी।
लेकिन जब घर की तलाशी पूरी हुई तो कुल 47 लाख रुपये नकद बरामद हुए। इसमें कथित तौर पर वही 5 लाख रुपये भी शामिल हैं, जो ट्रैप के दौरान जब्त किए गए।
विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक इतनी बड़ी राशि एक सरकारी कर्मचारी के घर से मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है।
आय से अधिक संपत्ति की जांच
एक सहायक अभियंता की अनुमानित मासिक आय वेतन और भत्तों सहित लगभग 70 हजार रुपये मानी जाती है।
यदि कोई कर्मचारी अपनी पूरी सैलरी बचाए भी, तो 47 लाख रुपये जमा करने में कई साल लग सकते हैं। वह भी तब, जब निजी खर्च बिल्कुल न हो।
ऐसे में यह मामला आय से अधिक संपत्ति की जांच की दिशा में आगे बढ़ सकता है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि बरामद नकदी के स्रोत की विस्तृत जांच होगी।
विजिलेंस की आगे की कार्रवाई
स्पेशल विजिलेंस यूनिट अब इस पूरे मामले में वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और संभावित संपत्तियों की पड़ताल करेगी।
यह भी जांच की जाएगी कि क्या यह रकम किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है या व्यक्तिगत स्तर पर ली गई रिश्वत का परिणाम।
अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी हो सकती है।
प्रशासनिक तंत्र पर सवाल
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग के अंदरूनी तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत सामने आती है।
हालांकि विभाग की ओर से अभी तक आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं हुआ है।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शुरुआत में सूचना केवल 5 लाख रुपये की घूस तक सीमित थी।
लेकिन छापेमारी में 47 लाख रुपये नकद मिलना यह संकेत देता है कि मामला सतही नहीं हो सकता।
अब जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करेंगी कि यह रकम कहां से आई, कितने समय में इकट्ठी हुई और क्या अन्य लोग भी इसमें शामिल हैं।
बेतिया इंजीनियर घूसकांड ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और बरामदगी से जुड़े नए तथ्य इस केस को और स्पष्ट करेंगे।
Source: स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SUV) और डीएसपी के बयान पर आधारित जानकारी
