पटना में तेज प्रताप-ऐश्वर्या तलाक केस की आज 24 फरवरी को फैमिली कोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है। इस तेज प्रताप-ऐश्वर्या तलाक केस में तीसरी बार समझौते की कोशिश की जाएगी। फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज सुनील दत्त पांडेय के सामने यह मामला रखा जाएगा। हाईकोर्ट द्वारा रिव्यू याचिका खारिज किए जाने के बाद यह सुनवाई और भी महत्वपूर्ण हो गई है। सवाल है—क्या आज सुलह होगी या कानूनी लड़ाई आगे बढ़ेगी?
तीसरी बार समझौते की कोशिश
तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय के बीच तलाक का मामला पहले भी कई बार सुनवाई में आ चुका है।
आज तीसरी बार अदालत दोनों पक्षों को समझौते का अवसर देगी। कोर्ट की प्राथमिकता रिश्ते को बचाने की कोशिश करना है।
अगर सुलह नहीं होती है, तो तलाक प्रक्रिया अपने कानूनी चरणों में आगे बढ़ सकती है।
हाईकोर्ट का क्या रहा रुख?
यह मामला पहले फैमिली कोर्ट से हाईकोर्ट पहुंचा था।
ऐश्वर्या राय ने हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी और दोनों पक्ष समझौते की दिशा में सहयोग करें।
इसके बाद मामला फिर से फैमिली कोर्ट में लौट आया।
क्यों है यह हाई प्रोफाइल केस?
यह तलाक मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि यह दो राजनीतिक परिवारों से जुड़ा है।
तेज प्रताप यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के पुत्र हैं।
वहीं, ऐश्वर्या राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय की पोती हैं। उनके पिता चंद्रिका राय भी राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
इसी वजह से यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा में रहा है।
ऐश्वर्या राय के आरोप क्या हैं?
ऐश्वर्या राय ने अपनी सास पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था।
वहीं, कानूनी हलकों में माना जाता है कि तलाक के लिए पुख्ता साक्ष्य जरूरी होंगे। अगर सबूत पर्याप्त नहीं हुए, तो याचिका खारिज भी हो सकती है।
फैमिली कोर्ट पहले ही अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश दे चुकी है।
गुजारा भत्ता और संपत्ति विवाद
इस मामले में आर्थिक मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।
ऐश्वर्या राय ने एसके पुरी में सुविधायुक्त आवास और 1.5 लाख रुपये मासिक भत्ता की मांग की है।
गोला रोड स्थित फ्लैट को लेकर भी विवाद सामने आया है।
इन मुद्दों पर अदालत को अंतिम निर्णय देना होगा, यदि समझौता नहीं होता।
शादी से विवाद तक का सफर
दोनों की शादी 12 मई 2018 को हुई थी।
लेकिन महज छह महीने बाद, नवंबर 2018 में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी गई।
तब से यह मामला कानूनी प्रक्रिया में है और कई चरणों से गुजर चुका है।
आज की सुनवाई क्यों अहम?
आज की सुनवाई कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है:
- तीसरी बार समझौते की कोशिश
- हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से इनकार के बाद पहली अहम सुनवाई
- अंतरिम भत्ते और आवास विवाद पर स्पष्टता की संभावना
अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो विवाद का समाधान संभव है।
अन्यथा, लंबी कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।
आम लोगों पर क्या असर?
हालांकि यह एक व्यक्तिगत मामला है, लेकिन इससे वैवाहिक विवादों में कानूनी प्रक्रिया की भूमिका स्पष्ट होती है।
इस फैसले से लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि अदालतें पहले समझौते को प्राथमिकता देती हैं, फिर कानूनी निष्कर्ष तक पहुंचती हैं।
साथ ही, गुजारा भत्ता और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों पर न्यायिक प्रक्रिया की अहमियत भी सामने आती है।
आगे क्या हो सकता है?
आज की सुनवाई के बाद तीन संभावनाएं बनती हैं:
- आपसी समझौता
- तलाक प्रक्रिया आगे बढ़े
- अगली तारीख तय हो
अब सबकी नजर कोर्ट रूम पर टिकी है।
क्या यह हाई प्रोफाइल मामला सुलह की राह पर जाएगा या कानूनी संघर्ष और लंबा चलेगा? फैसला अदालत के सामने है।
Source: न्यायालयी कार्यवाही से संबंधित आधिकारिक जानकारी
