नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में एक अहम याचिका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भी है, जिसमें उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर राजनीतिक भेदभाव और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में खुद अपना पक्ष रख सकती हैं। कम ही लोगों को पता है कि ममता बनर्जी एक प्रशिक्षित वकील भी हैं। उन्होंने कलकत्ता के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की है और आखिरी बार 2003 में वकालत करते हुए रिपोर्ट की गई थीं।
किस बेंच के सामने होगी सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कॉज लिस्ट के अनुसार,
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें
- जस्टिस जॉयमाल्य बागची
- जस्टिस विपुल एम. पंचोली
शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई करेगी।
ममता बनर्जी ने याचिका में क्या कहा?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में SIR प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस तरीके से यह पुनरीक्षण किया जा रहा है, उससे लाखों मतदाताओं, खासकर हाशिए पर पड़े वर्गों का वोट देने का अधिकार छीना जा सकता है।
उन्होंने चुनाव आयोग पर राजनीतिक मंशा से काम करने का आरोप लगाया और कहा कि एक संवैधानिक संस्था, जिससे निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की उम्मीद की जाती है, वह अब ऐसे स्तर पर पहुंच गई है जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट से सीधे हस्तक्षेप और चुनाव आयोग को उचित निर्देश देने की मांग की है।
टीएमसी नेताओं की याचिकाएं भी लिस्टेड
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस की ओर से
- लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा,
- राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन,
- और डोला सेन
ने भी पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इन याचिकाओं को भी मंगलवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
ईसीआई से मुलाकात के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि ममता बनर्जी ने सोमवार को नई दिल्ली में ECI मुख्यालय जाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी और SIR प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सीईसी पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने उन्हें ‘घमंडी’ बताते हुए कहा था कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर पश्चिम बंगाल को निशाना बना रहा है।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप
ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि
- ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से असली मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए गए हैं,
- और SIR प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष चुनावी रोल ऑब्जर्वर और माइक्रो-ऑब्जर्वर सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए नियुक्त किए गए हैं, जो संदेह पैदा करता है।
