पटना। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की कानूनी परेशानियां एक बार फिर बढ़ गई हैं। पटना की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने उनके खिलाफ कुर्की-जब्ती का आदेश जारी किया है। यह आदेश विशेष न्यायाधीश प्रवीण कुमार मालवीय की अदालत ने लंबे समय से अदालत में पेश न होने के कारण पारित किया।
अदालत ने पप्पू यादव के साथ-साथ दो अन्य आरोपियों शैलेंद्र प्रसाद और चंद्र नारायण प्रसाद के खिलाफ भी यही कार्रवाई की है।
पेशी से लगातार दूरी, अब सख्त कदम
अदालत के अनुसार, इससे पहले आरोपियों के खिलाफ
- गिरफ्तारी वारंट
- इश्तेहार जारी करने
जैसी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी थीं, लेकिन इसके बावजूद किसी आरोपी ने अदालत के सामने हाजिरी नहीं दी। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने कुर्की-जब्ती को अंतिम और सख्त कदम बताया है।
31 साल पुराना मामला
यह मामला 1995 का है। पटना के गर्दनीबाग थाना में दर्ज प्राथमिकी संख्या 552/1995 के अनुसार, शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि उनका मकान धोखे से किराए पर लिया गया।
शिकायत में कहा गया कि
- किराएदार ने तथ्यों को छिपाया
- मकान का इस्तेमाल सांसद कार्यालय के रूप में किया गया
- विरोध करने पर मकान मालिक को धमकी दी गई और डराया गया
अब क्या होगा आगे?
अदालत के आदेश के अनुसार, यदि आरोपी सरेंडर नहीं करते, तो पुलिस उनके खिलाफ संपत्ति की कुर्की-जब्ती की कार्रवाई कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी 2026 को तय की गई है। बताया जा रहा है कि उस दिन भी पेश न होने पर और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।
पप्पू यादव और सियासी असर
पप्पू यादव बिहार की राजनीति का बड़ा नाम माने जाते हैं और वे पूर्णिया से कई बार सांसद रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत दर्ज की है। हालांकि, उनके राजनीतिक करियर के साथ-साथ कानूनी विवाद भी जुड़े रहे हैं।
जहां कुछ मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है, वहीं अदालत का यह ताजा आदेश उनकी राजनीतिक छवि पर असर डाल सकता है। पप्पू यादव के समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, जबकि शिकायतकर्ता को अब भी न्याय मिलने की उम्मीद है।
