बिहार के किसानों को बड़ी राहत मिली है। बिहार के किसानों के खाते में शनिवार को 113 करोड़ 16 लाख रुपये से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना से डीबीटी के माध्यम से यह राशि जारी की। यह भुगतान कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत बाढ़ और मोन्था तूफान से फसल क्षति झेलने वाले बिहार के किसानों को दिया गया। राज्य के 13 जिलों के 2 लाख 2 हजार से अधिक किसानों को इसका लाभ मिला। सरकार का उद्देश्य प्रभावित किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए आर्थिक सहारा देना है।
इस फैसले से लोगों को तुरंत राहत मिलेगी और खेती की तैयारी में आई आर्थिक रुकावट कम होगी।
कृषि इनपुट अनुदान योजना क्या है?
कृषि इनपुट अनुदान योजना राज्य सरकार की वह योजना है, जिसके तहत प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान होने पर किसानों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
साल 2025 में भारी बारिश और मोन्था तूफान की वजह से कई जिलों में फसलें बर्बाद हो गई थीं। इसके बाद कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों से ऑनलाइन आवेदन मांगे।
जिलास्तर पर सत्यापन के बाद योग्य किसानों की सूची तैयार की गई और अब उन्हें डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खातों में राशि भेजी गई।
किन जिलों के किसानों को मिला लाभ?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 13 जिलों के किसान इस अनुदान से लाभान्वित हुए हैं। इनमें शामिल हैं:
- बेगूसराय
- भोजपुर
- दरभंगा
- गया
- कैमूर
- किशनगंज
- मधेपुरा
- मधुबनी
- मुजफ्फरपुर
- पूर्वी चम्पारण
- शिवहर
- सीतामढ़ी
- सुपौल
इन जिलों के 53 प्रखंड और 493 पंचायतों में फसल क्षति दर्ज की गई थी। प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को प्राथमिकता के आधार पर सहायता राशि दी गई।
कितनी राशि और कितने किसानों को फायदा?
राज्य सरकार ने कुल 113 करोड़ 16 लाख रुपये की राशि जारी की है।
करीब 2,02,000 किसानों के खाते में यह पैसा सीधे ट्रांसफर हुआ है। डीबीटी प्रणाली के कारण बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।
सरकार का दावा है कि यह राशि किसानों को आगामी बुवाई और कृषि कार्यों के लिए उपयोगी साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ पीड़ित किसानों के साथ खड़ी है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित किसान इस राशि का उपयोग अगली फसल की तैयारी में कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की मदद करना प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में किसानों की डिजिटल आईडी बनाई जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी योजना का लाभ सीधे और तेजी से मिल सके।
ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया
कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे।
इसके बाद जिला प्रशासन ने फसल क्षति का सत्यापन किया। पात्र पाए गए किसानों की सूची तैयार कर डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया गया।
यह प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध रखने की कोशिश की गई, जिससे किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े।
आम किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
लगातार बाढ़ और तूफान से कई छोटे और सीमांत किसान आर्थिक संकट में आ गए थे।
ऐसे समय में सीधे बैंक खाते में अनुदान राशि मिलना बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे किसानों को बीज, खाद और अन्य कृषि संसाधन खरीदने में मदद मिलेगी।
इस फैसले से लोगों को यह भरोसा मिला है कि आपदा की स्थिति में सरकार आर्थिक सहायता देने के लिए सक्रिय है।
आगे की तैयारी पर जोर
राज्य सरकार का फोकस अब आगामी फसल सीजन की तैयारी पर है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर आर्थिक सहायता मिलने से उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। डिजिटल आईडी और डीबीटी व्यवस्था भविष्य में योजनाओं को और प्रभावी बना सकती है।
Source: राज्य सरकार / कृषि विभाग की आधिकारिक जानकारी
