बिहार बजट 2026-27: एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता, केंद्र पर निर्भरता बनी सबसे बड़ी चुनौती

 


पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार, 3 जनवरी को नीतीश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन में 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। सरकार ने इसे बिहार के विकास का रोडमैप बताया, लेकिन अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विशेषज्ञों को यह बजट खास प्रभावित नहीं कर सका।

केंद्र पर अत्यधिक निर्भरता बनी चिंता

बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (BIPFP) के फैकल्टी सदस्य बख्शी अमित कुमार सिन्हा ने बजट को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था अब भी केंद्र सरकार की सहायता पर अत्यधिक निर्भर है, जो दीर्घकालिक रूप से सही संकेत नहीं है।

उनके अनुसार, बिहार के कुल राजस्व का 73.6 फीसदी हिस्सा केंद्र से आता है, जिसमें

  • 55.4 फीसदी टैक्स में हिस्सेदारी
  • 18.2 फीसदी केंद्रीय सहायता अनुदान शामिल है।

बजट अनुमान और केंद्रीय प्रावधान में अंतर

बख्शी अमित कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र से 1.58 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया है, जबकि केंद्रीय बजट में बिहार के लिए केवल 1.52 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है। इससे करीब 6,000 करोड़ रुपये का अंतर पैदा होता है, जो कुल बजट का लगभग 2 फीसदी है और यह बिहार की वित्तीय योजना के लिए चुनौती बन सकता है।

बड़े राज्यों से काफी पीछे बिहार

उन्होंने यह भी कहा कि बजट के आकार के मामले में बिहार अभी भी बड़े राज्यों से काफी पीछे है।

  • उत्तर प्रदेश का बजट: 8.1 लाख करोड़ रुपये
  • महाराष्ट्र का बजट: 7.6 लाख करोड़ रुपये
  • बिहार: बजट आकार में देश में लगभग 10वें स्थान पर

इसके साथ ही 2026-27 के लिए बिहार का प्रति व्यक्ति बजट आवंटन लगभग 27,000 रुपये है।

स्थिर विकास की नींव, लेकिन लंबी राह बाकी

वहीं पटना विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर अविरल पांडे ने बजट को संतुलित और स्थिर विकास की दिशा में कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने राजकोषीय घाटे को 3 फीसदी के करीब रखकर वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है।

उनके अनुसार, बजट परिव्यय में 30,694 करोड़ रुपये की वृद्धि एनडीए सरकार के तहत प्रयोग की बजाय मजबूती को दर्शाती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बजट की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि

  • कौशल विकास
  • महिलाओं की कार्यबल भागीदारी
  • पर्यटन, खेल और शहरीकरण
  • निजी निवेश

को किस हद तक उत्पादक और स्थायी रोजगार में बदला जा पाता है।

सात निश्चय-3 पर सरकार का फोकस

बजट में सात निश्चय-3 के तहत

  • 1 करोड़ नौकरियां सृजित करने,
  • प्रति व्यक्ति आय दोगुनी करने,
  • और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण

पर विशेष जोर दिया गया है।

पूंजीगत व्यय में गिरावट चिंता का विषय

बख्शी अमित कुमार सिन्हा के अनुसार, सरकार ने 2.31 लाख करोड़ रुपये विकास व्यय के लिए आवंटित किए हैं, जो कुल बजट का 66.5 फीसदी है और पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 फीसदी अधिक है।
हालांकि, चिंता की बात यह है कि 2026-27 में पूंजीगत व्यय में 2.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि बजट का बड़ा हिस्सा रखरखाव और स्थापना लागत में चला जा रहा है।

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