बड़ा अपडेट: 10 फर्जी लोन ऐप से सावधान, साइबर अलर्ट

 


डिजिटल दौर में बढ़ते फर्जी लोन ऐप को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। साइबर यूनिट ने शनिवार को 10 संदिग्ध फर्जी लोन ऐप की पहचान की, जिन्हें विदेशी शत्रुतापूर्ण संस्थाएं होस्ट कर रही हैं। यह कार्रवाई देशभर में मिल रही शिकायतों के आधार पर की गई। गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर अपराध समन्वय केंद्र के विश्लेषण में सामने आया कि ये एप लोन के नाम पर डेटा चोरी और ब्लैकमेलिंग करते हैं। जांच में पता चला कि ये एप खुद को वैध भारतीय कंपनियां दिखाकर लोगों को जाल में फंसाते हैं।

इस अलर्ट से लोगों को सतर्क रहने की सख्त जरूरत है, क्योंकि एक क्लिक आपकी निजता और बचत दोनों पर भारी पड़ सकता है।


कौन-कौन से ऐप आए रडार पर?

साइबर यूनिट ने जिन 10 एप की पहचान की है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • दिया क्रेडिट एप
  • रुपेनेक्स एप
  • फंड एक्सेस एप
  • बेचराजी डिजिटल बही एप
  • ओकलोन – पर्सनल लोन एप
  • केयरपे – सिंपल लोन्स एंड फास्ट कैश एप
  • क्रेडिब्लून एप
  • रुपी लेक-लाइन क्रेडिट एप
  • ईज फंड एप
  • मनीडाक एप

जांच एजेंसियों का कहना है कि इन एप की प्लेस्टोर पर 4.4 से 4.6 स्टार रेटिंग दिखाई गई है। हजारों रिव्यू भी मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कई फर्जी हो सकते हैं।


कैसे काम करता है डिजिटल हफ्ता वसूली मॉड्यूल?

गृह मंत्रालय ने इन एप को “डिजिटल हफ्ता वसूली” का नया हथियार बताया है।

प्रक्रिया लुभावने विज्ञापन से शुरू होती है। एप बिना ज्यादा दस्तावेज के कुछ ही मिनटों में लोन देने का दावा करते हैं।

जैसे ही यूजर एप इंस्टॉल करता है, वह अनजाने में फोन की गैलरी, कॉन्टैक्ट लिस्ट, लोकेशन और मैसेज का एक्सेस दे देता है।

सारा डेटा तुरंत विदेशी सर्वर पर ट्रांसफर किया जाता है।


लोन की शर्तें क्यों हैं खतरनाक?

इन एप की लोन प्रक्रिया भी संदिग्ध पाई गई है।

ये 7 से 15 दिन की छोटी अवधि के लिए कर्ज देते हैं। प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 30 से 40 प्रतिशत राशि पहले ही काट लेते हैं।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई 10 हजार रुपये का लोन लेता है तो 6 से 7 हजार ही खाते में पहुंचते हैं।

किस्त में थोड़ी भी देरी होने पर धमकी भरे कॉल शुरू हो जाते हैं।


ब्लैकमेलिंग और सोशल शेमिंग का खेल

जांच में सामने आया कि ठग पीड़ित की कॉन्टैक्ट लिस्ट से रिश्तेदारों और दोस्तों को कॉल करते हैं।

कुछ मामलों में तस्वीरों को मॉर्फ कर अश्लील सामग्री बनाने की धमकी दी जाती है।

यह मानसिक दबाव बनाकर जबरन वसूली का तरीका है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यही इन एप का सबसे खतरनाक पहलू है।


एक वास्तविक मामला

अहियापुर थाना क्षेत्र के रंजन यादव ने रुपेनेक्स एप से 10 हजार रुपये का लोन लिया था।

राशि मिलने से पहले 40 प्रतिशत काट लिया गया। बाकी रकम 10 दिन में लौटाने को कहा गया।

समय पर भुगतान न करने पर उनके रिश्तेदारों को कॉल कर धमकियां दी गईं।

बाद में उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।


सरकार और साइबर यूनिट की सलाह

साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने कहा कि लोगों को अनजान एप को कॉन्टैक्ट या गैलरी एक्सेस देने से बचना चाहिए।

हमेशा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित और पंजीकृत संस्थाओं से ही लोन लें।

किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

एप इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर और रजिस्ट्रेशन की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर जांच लें।


आम नागरिकों के लिए क्या संदेश?

फर्जी लोन ऐप केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक शांति भी छीन लेते हैं।

इस फैसले से लोगों को जागरूक होने का स्पष्ट संदेश मिला है कि डिजिटल सुविधा के साथ सतर्कता भी जरूरी है।

एक छोटी सी लापरवाही बड़े संकट में बदल सकती है।

डिजिटल इंडिया के दौर में सुरक्षित डिजिटल व्यवहार ही सबसे बड़ा बचाव है।


कैसे रहें सुरक्षित? (Quick Checklist)

  • अनजान एप इंस्टॉल न करें
  • कॉन्टैक्ट और गैलरी एक्सेस सोच-समझकर दें
  • आरबीआई रजिस्टर्ड संस्थाओं से ही लोन लें
  • फर्जी रेटिंग और रिव्यू से सावधान रहें
  • किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की तुरंत शिकायत करें


Source: साइबर यूनिट और गृह मंत्रालय की चेतावनी

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