बड़ा अपडेट: रीना पासवान पर चिराग की दो टूक, नहीं जाएंगी राज्यसभा

 


बिहार में Rajya Sabha Elections 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज है। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने साफ किया कि उनकी मां रीना पासवान राज्यसभा नहीं जाएंगी। पटना और हाजीपुर में चल रही चर्चाओं के बीच यह बयान आया। Rajya Sabha Elections 2026 में पांच सीटों पर चुनाव होना है और एनडीए की संभावित बढ़त को लेकर अटकलें थीं। चिराग ने स्पष्ट किया कि उनकी मां सक्रिय राजनीति से दूर रहना चाहती हैं और किसी सीट पर उनकी दावेदारी नहीं है।

इस बयान से राजनीतिक अटकलों पर विराम लगा है और गठबंधन समीकरणों पर नई चर्चा शुरू हो गई है।


क्या थी चर्चा?

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं।

विधानसभा में संख्या बल के आधार पर चार सीटों पर एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। दो सीटें जेडीयू और दो बीजेपी के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है।

इसी बीच यह चर्चा चली कि एक सीट पर चिराग पासवान दावा कर सकते हैं और उनकी मां रीना पासवान को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

हालांकि अब खुद चिराग ने इन खबरों को खारिज कर दिया है।


चिराग पासवान का स्पष्ट बयान

मीडिया से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि उनकी मां राजनीति में नहीं आ रहीं।

उन्होंने कहा, “मेरी मां सक्रिय राजनीति से दूर रहती हैं और दूर ही रहना चाहती हैं। इसे किसी भी तरह की बहस का हिस्सा न बनाया जाए।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पांचों सीटों में से किसी पर भी रीना पासवान की दावेदारी नहीं है।

यह बयान ऐसे समय में आया जब गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर अटकलें तेज थीं।


एनडीए की पांचों सीटों पर दावा

चिराग पासवान ने भरोसा जताया कि एनडीए गठबंधन पांचों सीटें जीतेगा।

उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि गठबंधन को पूर्ण सफलता मिलेगी।

हालांकि उपेंद्र कुशवाहा को एक सीट मिलने के सवाल पर उन्होंने सीधे प्रतिक्रिया नहीं दी और शांत नजर आए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीट बंटवारे पर अंतिम निर्णय गठबंधन नेतृत्व स्तर पर होगा।


विपक्ष पर भी साधा निशाना

इससे पहले हाजीपुर में चिराग पासवान ने विपक्ष पर हमला बोला।

उन्होंने कहा कि राज्य में यदि कोई घटना होती है तो वह सरकार के लिए चिंता का विषय है। विपक्ष चाहे इसे राजनीतिक मुद्दा बनाए, लेकिन सरकार इसे गंभीरता से लेती है।

उन्होंने कहा कि गृह विभाग ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।


सियासी समीकरण पर असर

रीना पासवान को लेकर चली अटकलें कई राजनीतिक मायने रखती थीं।

यदि ऐसा होता, तो यह पारिवारिक राजनीतिक विरासत की चर्चा को हवा दे सकता था। लेकिन चिराग के बयान से साफ है कि फिलहाल ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।

इस फैसले से लोगों को यह संकेत मिला है कि उम्मीदवार चयन में व्यक्तिगत चर्चाओं से ज्यादा गठबंधन की रणनीति अहम होगी।


जनता के लिए क्या मायने?

राज्यसभा चुनाव भले प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा न चुने जाते हों, लेकिन इनके राजनीतिक प्रभाव दूरगामी होते हैं।

राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का असर राष्ट्रीय नीतियों और राज्य के मुद्दों पर पड़ता है।

ऐसे में उम्मीदवारों को लेकर पारदर्शिता और स्पष्टता राजनीतिक विश्वास को मजबूत करती है।

इस फैसले से लोगों को स्पष्ट संदेश मिला है कि परिवारवाद को लेकर उठ रही चर्चाओं पर विराम लगाया गया है।


आगे की राह

अब सबकी नजर सीट बंटवारे के अंतिम ऐलान पर है।

एनडीए के भीतर किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

वहीं विपक्ष भी अपनी रणनीति तैयार कर रहा है।

राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है और राज्यसभा चुनाव 2026 से पहले बयानबाजी तेज होने की संभावना है।


Source: मीडिया बातचीत और सार्वजनिक बयान

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