बिहार में 40 लाख परिमार्जन आवेदन के निपटारे को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। क्या, कब और कैसे—इस पर साफ निर्देश जारी हुए हैं। उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha ने पटना में कहा कि राज्य के सभी राजस्व कर्मचारी और अंचलाधिकारी 31 मार्च तक 40 लाख परिमार्जन आवेदन का निपटारा करें। सरकार का उद्देश्य जमीन विवाद कम करना और दाखिल-खारिज प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। यह निर्देश इसलिए दिया गया है ताकि लंबित मामलों से परेशान आम लोगों को राहत मिल सके और राजस्व व्यवस्था सुचारु हो सके।
सरकार का दावा है कि तय समयसीमा में कार्रवाई से ग्रामीण इलाकों में बढ़ते भूमि विवादों पर अंकुश लगेगा।
इस फैसले से लोगों को जमीन से जुड़े मामलों में तेज समाधान की उम्मीद जगी है।
31 मार्च तक लक्ष्य पूरा करने का निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि 31 मार्च अंतिम समयसीमा है। सभी अंचलाधिकारी (सीओ) और राजस्व कर्मचारी विभागीय लक्ष्य को प्राथमिकता दें।
अभी सबसे बड़ी चुनौती 40 लाख लंबित परिमार्जन आवेदनों की है। ये आवेदन भूमि रिकॉर्ड में सुधार, नाम सुधार, रकबा संशोधन और अन्य त्रुटियों से जुड़े हैं।
सरकार मानती है कि इन आवेदनों के निपटारे से किसानों को रजिस्ट्रेशन और भूमि सर्वेक्षण में बड़ी राहत मिलेगी।
राजस्व कर्मचारियों की मांगों पर सरकार गंभीर
हाल ही में राजस्व कर्मचारी ग्रेड पे और अन्य सुविधाओं को लेकर हड़ताल पर गए थे। इस पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार हो रहा है। प्रधान सचिव और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के परिणाम जल्द सामने आ सकते हैं।
सरकार का संदेश साफ है—काम और सुविधा साथ-साथ।
बेहतर प्रदर्शन पर प्रमोशन का भरोसा
सरकार ने अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम की भी घोषणा की है।
जो अंचलाधिकारी समय पर लक्ष्य पूरा करेंगे, उन्हें डीसीएलआर पद पर प्रोन्नति देने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। संबंधित फाइलें मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक जाएंगी।
यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही और प्रतिस्पर्धा दोनों को बढ़ा सकता है।
जमीन विवाद घटाने के लिए रोज सुनवाई
राज्य के 101 डीसीएलआर को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने न्यायालयों में प्रतिदिन सुनवाई करें।
दाखिल-खारिज के सही मामलों को अधिकतम तीन सुनवाई में निपटाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इसके अलावा डीसीएलआर न्यायालयों को सुविधाएं बढ़ाने के लिए 50-50 हजार रुपये की राशि दी गई है, ताकि जरूरी किताबें और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।
अपर समाहर्ता और प्रमंडलीय आयुक्त स्तर पर भी लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
बिहार में जमीन विवाद अक्सर लंबे समय तक अदालतों में अटके रहते हैं। इससे किसान, ग्रामीण परिवार और छोटे भू-स्वामी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
यदि 40 लाख परिमार्जन आवेदन समय पर निपटते हैं, तो भूमि रिकॉर्ड अपडेट होंगे और भविष्य में विवाद की संभावना घटेगी।
इस फैसले से लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ सकते हैं। रजिस्ट्री, बैंक लोन और फसल बीमा जैसी प्रक्रियाएं भी आसान होंगी।
सरकार का फोकस स्पष्ट है—राजस्व प्रणाली को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना।
क्यों अहम है यह कदम?
- 40 लाख लंबित आवेदन प्रशासनिक दबाव का संकेत
- जमीन विवाद से जुड़े हजारों केस अदालतों में लंबित
- किसानों और ग्रामीण परिवारों पर सीधा असर
- राजस्व विभाग की कार्यक्षमता की परीक्षा
यदि तय समयसीमा में लक्ष्य पूरा होता है, तो यह प्रशासनिक सुधार का बड़ा उदाहरण बन सकता है।
बिहार सरकार का यह कदम जमीन विवाद कम करने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक प्रयास माना जा रहा है। अब निगाह 31 मार्च की डेडलाइन पर है।
Source: पत्रकार वार्ता, पटना
