मंत्रियों के अलावा 15 विधायकों को भी पटना में मिलेंगे दो-दो बंगले, कौन हैं ये लोग?

 मंत्रियों के अलावा 15 विधायकों को भी पटना में मिलेंगे दो-दो बंगले, कौन हैं ये लोग?


बिहार कैबिनेट की हालिया बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने प्रदेश के सियासी गलियारे में हलचल तेज कर दी है। सरकार ने विधायकों और मंत्रियों के लिए 'डबल बंगले' की नीति को मंजूरी देकर एक नया दांव चला है।

इस निर्णय के तहत मंत्रियों के बिहार के कुछ खास विधयाक हैं जिन्हें केंद्रीय पूल से अतिरिक्त बंगला दिया जाएगा जो मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं बन पाए थे। जहां सरकार इसे बेहतर कार्यक्षमता और सुविधा से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे सरकारी संसाधनों की फिजूलखर्ची बताकर घेरने की तैयारी में है।

15 वरिष्ठ विधायकों के लिए 'डबल' तोहफा

नीतीश कैबिनेट ने उन 15 वरिष्ठ विधायकों की नाराजगी दूर करने का रास्ता निकाला है, जो लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं लेकिन वर्तमान सरकार में मंत्री नहीं हैं। अब इन विधायकों को उनके निर्वाचन क्षेत्र के लिए आवंटित सामान्य विधायक आवास के अलावा, राजधानी पटना के केंद्रीय पूल से एक अतिरिक्त बड़ा बंगला किराए पर दिया जाएगा। इसे राजनीतिक गलियारे में संतुलन बनाने की नीति के रूप में देखा जा रहा है ताकि प्रभावशाली नेताओं को संतुष्ट रखा जा सके।

कैसे होगा वरिष्ठ विधायकों का चयन?

भवन निर्माण विभाग के अनुसार, केंद्रीय पूल से अतिरिक्त आवास पाने के लिए कड़ी शर्तें तय की गई हैं। यह सुविधा केवल उन वरिष्ठ सदस्यों को मिलेगी जो 6 या उससे अधिक बार विधानमंडल के सदस्य रहे हों। इसके अलावा, जो नेता कम से कम एक बार मंत्रिपरिषद के सदस्य रहे हों, तीन बार राज्य मंत्रिपरिषद का हिस्सा रहे हों, या पूर्व में बिहार के मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री रह चुके हों, उन्हें ही दूसरा बंगला आवंटित किया जाएगा। इन्ही मानकों के आधार पर 15 वरिष्ठ विधायकों का चयन होगा।

RJD ने उठाए सवाल

आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने नीतीश सरकार के इस फैसले पर तीखा प्रहार करते हुए इसे 'अनैतिक और अनुचित' करार दिया है। उनका कहना है कि मंत्रियों और विधायकों को मिलने वाले मौजूदा आवास उनके सरकारी और विधाई कार्यों के लिए पर्याप्त हैं। आरजेडी ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि एक बंगले से काम नहीं चल रहा? उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यसभा और लोकसभा सांसदों के पटना आवासों पर उठते सवालों से बचने के लिए यह "अनर्गल" निर्णय लिया गया है।

बंगले को लेकर पहले भी होता रहा है विवाद

बिहार में सरकारी बंगलों को लेकर विवाद का इतिहास पुराना रहा है। तेजस्वी यादव के बंगले से लेकर पूर्व मंत्रियों के आवास खाली कराने तक, यह मुद्दा हमेशा चर्चा में रहता है। अब 15 वरिष्ठ विधायकों और मंत्रियों को अतिरिक्त बंगला देने के फैसले पर भी राजनीतिक घमासान शुरू होने के आसार हैं। आलोचकों का मानना है कि जब राज्य विकास के अन्य पैमानों पर संघर्ष कर रहा है, तब नेताओं को दो-दो बंगले देना जनता के टैक्स के पैसों का अनुचित उपयोग हो सकता है।

Bihar Ministers Double Bungalow: मंत्रियों और दिग्गजों को दो-दो आवास

कैबिनेट के नए फैसले के अनुसार, अब बिहार के सभी मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति व उपसभापति को दो-दो आवास रखने की सुविधा मिलेगी। इसमें भवन निर्माण विभाग द्वारा आवंटित केंद्रीय पूल के बंगले के साथ-साथ विधानमंडल पूल का निर्वाचन क्षेत्र वार आवंटित आवास भी शामिल होगा। सरकार का तर्क है कि इससे जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के लोगों और विभागीय कार्यों को प्रबंधित करने में अधिक आसानी होगी।

1700 रुपये देना होगा किराया

खास बात यह है कि अतिरिक्त बंगले के लिए विधायकों को मात्र 1700 रुपये प्रति माह का मामूली किराया देना होगा। नीतीश सरकार ने इस फैसले का बचाव करते हुए तर्क दिया है कि कई मंत्री विधायक भी होते हैं, जिन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता से मिलने और विधायी कार्यों के लिए 'विधायक आवास' की जरूरत पड़ती है। सरकार के अनुसार, दो आवास होने से मंत्रियों और वरिष्ठ विधायकों को अपने विभागीय और क्षेत्रीय दायित्वों को निभाने में अधिक सुविधा होगी।

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