Sonam Wangchuk पर बोले NDA सांसद, कहा- सरकार ने शुरू की सकारात्मक पहल
Sonam Wangchuk Case को लेकर देशभर में जारी चर्चा के बीच बिहार के खगड़िया से लोकसभा सांसद राजेश वर्मा ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। Sonam Wangchuk Case पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से जो भी कार्रवाई की गई है, वह हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है। उनका कहना है कि सरकार इस मामले में सकारात्मक कदम उठा रही है और लोगों को थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है।
सांसद ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया गया है। सरकार उनके मुद्दों पर पहल कर रही है, इसलिए जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय आगे की प्रक्रिया का इंतजार करना चाहिए।
राजेश वर्मा ने हाई कोर्ट के फैसले का किया उल्लेख
पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजेश वर्मा ने कहा कि इस पूरे मामले को हाई कोर्ट के आदेशों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार प्रशासन ने जो कदम उठाए हैं, वे न्यायालय के निर्देशों के आधार पर ही किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद यदि लोग अनशन पर बैठे हैं, तो उनकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। हालांकि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाए हुए है और समाधान की दिशा में प्रयास जारी हैं।
सांसद का कहना था कि ऐसे संवेदनशील मामलों में संयम और धैर्य दोनों जरूरी हैं।
'मांग जायज हो सकती है, लेकिन धैर्य जरूरी'
राजेश वर्मा ने कहा कि लोगों की मांगों को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्वीकार किया कि कई मुद्दे ऐसे होते हैं जिन पर चर्चा और समाधान की जरूरत होती है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने संबंधित विषय पर पहल शुरू कर दी है। इसलिए सभी पक्षों को कुछ समय देना चाहिए ताकि बातचीत और प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से उचित समाधान निकल सके।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी प्रक्रिया का इंतजार करें।
बांकीपुर उपचुनाव पर भी दिया बयान
सोनम वांगचुक मामले के अलावा सांसद राजेश वर्मा ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार पर टिप्पणी करने से बेहतर है कि जनता के फैसले का इंतजार किया जाए। उनके मुताबिक बांकीपुर की जनता अपना मन बना चुकी है और चुनाव परिणाम में एनडीए को बड़ी सफलता मिलने का भरोसा है।
उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता नेताओं की कथनी और करनी दोनों का आकलन करते हैं। इसलिए अंतिम निर्णय जनता के हाथ में है।
सोनम वांगचुक की पत्नी ने क्या कहा?
इस बीच सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी मीडिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उनके निजी डॉक्टरों को सोनम वांगचुक से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
उनके अनुसार परिवार चाहता है कि उनके भरोसेमंद चिकित्सक भी स्वास्थ्य संबंधी सलाह दें, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिवार चाहे तो उसे अपनी पसंद के अस्पताल या डॉक्टर से इलाज कराने का विकल्प मिलना चाहिए।
स्वास्थ्य को लेकर भी जताई चिंता
गीतांजलि जे. आंगमो ने दावा किया कि अस्पताल का माहौल उनके पति के लिए मानसिक दबाव बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि सामान्य रूप से नियंत्रित रहने वाला उनका रक्तचाप हाल के दिनों में बढ़ा है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में भर्ती किए जाने से एक दिन पहले तक उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश स्वास्थ्य मानक सामान्य थे। उनका कहना है कि परिवार चाहता है कि इलाज से जुड़े फैसलों में उनकी राय को भी महत्व दिया जाए।
मामला क्यों बना चर्चा का विषय?
सोनम वांगचुक से जुड़ा यह मामला पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।
एक ओर सरकार और प्रशासन अपनी प्रक्रिया का पालन करने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परिवार और समर्थक स्वास्थ्य संबंधी फैसलों में अधिक स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर होने वाले निर्णय और न्यायिक प्रक्रिया इस पूरे मामले की आगे की दिशा तय कर सकते हैं।
