Darbhanga Flood News: उफनाईं कोसी-कमला, 20+ गांव डूबे, 6 बने टापू
Darbhanga Flood News ने मिथिलांचल के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। Darbhanga Flood News के तहत नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश और कोसी बैराज से छोड़े गए पानी का असर अब दरभंगा जिले में साफ दिखाई दे रहा है। कोसी और कमला बलान नदियां उफान पर हैं, जिससे कुशेश्वरस्थान पूर्वी और घनश्यामपुर प्रखंड के 20 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट चुका है और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में नावों की व्यवस्था की गई है, जबकि निचले क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। हालात पर जिला प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।
कोसी और कमला बलान के उफान से बिगड़े हालात
नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कोसी और कमला बलान नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कोसी बैराज से पानी छोड़े जाने के करीब चार दिन बाद इसका असर दरभंगा के कई इलाकों में देखने को मिल रहा है।
सबसे अधिक प्रभावित कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड है, जहां ईटहर, चौकिया, लक्ष्मीनियां, बलथरवा, बसबरिया और भरैन टोला समेत छह गांव पूरी तरह मुख्य भूमि से कट गए हैं। इन गांवों तक पहुंचने का एकमात्र साधन अब नाव ही बचा है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे बाजार, अस्पताल, बैंक और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
20 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में, नाव बनी सहारा
बाढ़ का पानी तेजी से निचले इलाकों में फैलने के कारण 20 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं। हजारों लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं और दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में फिलहाल 13 नावें संचालित की जा रही हैं, जबकि जिला स्तर पर कुल 186 सरकारी नावों की व्यवस्था की गई है। जरूरत पड़ने पर निजी नावों को भी संचालन की अनुमति दी गई है ताकि लोगों का आवागमन बाधित न हो।
हालांकि कई ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी नावों की संख्या पर्याप्त नहीं है। इसके चलते उन्हें निजी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां प्रति व्यक्ति किराया लिया जा रहा है।
स्कूलों में घुसा बाढ़ का पानी, पढ़ाई पर असर
बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। लक्ष्मीनियां प्राथमिक विद्यालय में पानी घुस गया है, जबकि ईटहर पोखर प्राथमिक विद्यालय चारों ओर से पानी से घिर गया है।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो सुरक्षा को देखते हुए इन विद्यालयों में पढ़ाई अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया जा सकता है।
ऐसी स्थिति में बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
प्रशासन अलर्ट पर, राहत शिविर और सामुदायिक रसोई तैयार
जिला प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत कार्यों की व्यापक तैयारी की है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार 512 स्थानों को राहत शिविरों के लिए चिन्हित किया गया है।
इसके अलावा जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 611 सामुदायिक रसोई भी तैयार रखी गई हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि सभी तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
दो दर्जन संवेदनशील गांवों को खाली करने के निर्देश
लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने करीब दो दर्जन संवेदनशील गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
अधिकारियों के अनुसार यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।
लोगों के लिए प्रशासन की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचने और बच्चों व बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है तो आने वाले दिनों में जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है।
दरभंगा समेत मिथिलांचल के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति फिलहाल चिंता का विषय बनी हुई है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं तथा प्रशासन प्रभावित परिवारों तक हर संभव सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
