Sonam Wangchuk ने 26 दिन बाद खत्म किया अनशन, NEET Paper Leak पर सरकार का बड़ा ऐलान

 


Sonam Wangchuk ने 26 दिन तक चले अपने अनशन को गुरुवार देर रात समाप्त कर दिया। Sonam Wangchuk का यह फैसला केंद्र सरकार के साथ कई मुद्दों पर सहमति बनने के बाद सामने आया। इसी दौरान NEET Paper Leak विवाद को लेकर भी केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया। सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट, दोषियों पर सख्त कानून और छात्रों की मांगों पर सकारात्मक विचार का भरोसा दिया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, शिक्षा सुधार और छात्रों के भविष्य को लेकर बहस तेज है। सरकार और प्रदर्शनकारी पक्षों के बीच हुई बातचीत के बाद कई अहम घोषणाएं सामने आई हैं, जिनका असर आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

Sonam Wangchuk ने क्यों खत्म किया 26 दिन का अनशन?

जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया है। उनके अनुसार, विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या पत्र लिखकर अनशन खत्म करने की अपील की थी।

उन्होंने कहा कि सरकार के साथ लंबी बातचीत और देश में किसी भी प्रकार की संभावित हिंसा को रोकने की भावना से यह निर्णय लिया गया। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने और किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने की अपील की।

सरकार ने NEET Paper Leak पर क्या बड़े भरोसे दिए?

सरकार ने NEET Paper Leak विवाद को लेकर कई महत्वपूर्ण कदमों का संकेत दिया है। सबसे बड़ा प्रस्ताव पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों को कड़ी सजा देने वाला नया कानून तैयार करना है।

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार—

  • पेपर लीक मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव।
  • दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का नया कानून।
  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज मामलों को लेकर सकारात्मक विचार।
  • संसद में NEET Paper Leak और शिक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा कराने का आश्वासन।
  • पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर भी विचार।

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा कि परीक्षा पेपर लीक लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को इस समस्या से निपटने के लिए ठोस उपाय तैयार करने का निर्देश दिया गया था और अब कानून का मसौदा तैयार हो चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित मसौदा केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा और अगले सप्ताह संसद में भी पेश किया जा सकता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार के अनुसार, लाखों छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बचाने के लिए परीक्षाएं तय समय में पूरी कराई गईं और परिणाम भी घोषित किए गए। पेपर लीक मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी होने की जानकारी भी दी गई।

CJP ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया

Sonam Wangchuk के अनशन समाप्त करने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है।

पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि Sonam Wangchuk के साहस और त्याग ने पूरे देश का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर फैसला नहीं हो जाता।

विपक्ष ने सरकार के ऐलान पर उठाए सवाल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों को संबोधित नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। साथ ही छात्रों पर हुई कार्रवाई की जवाबदेही तय करने और सरकार से माफी मांगने की भी मांग दोहराई।

शिक्षा मंत्रालय में भी हुआ बड़ा प्रशासनिक बदलाव

इसी घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग में भी प्रशासनिक बदलाव किया है।

कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने वरिष्ठ IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया है। उन्होंने विनीत जोशी का स्थान लिया है, जिन्हें पंचायती राज विभाग का सचिव बनाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा सुधार, भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में आने वाले समय में कई नई पहल देखने को मिल सकती हैं।

आगे क्या हो सकता है?

सरकार द्वारा प्रस्तावित फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कानून पर अब सभी की नजरें टिकी हैं। यदि यह कानून संसद से पारित होता है, तो भविष्य में पेपर लीक जैसे मामलों में तेजी से सुनवाई और कड़ी सजा का रास्ता खुल सकता है।

दूसरी ओर, छात्रों के आंदोलन और विपक्ष की मांगों के चलते शिक्षा सुधार का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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