समस्तीपुर DRM कार्यालय से APO को CBI ने क्यों किया गिरफ्तार? ₹50 हजार रिश्वत लेते पकड़ा गया, घर से मिले अवैध हथियार

 


Samastipur DRM Office गुरुवार को उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब Samastipur DRM Office में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम ने छापेमारी कर कार्मिक विभाग के सहायक कार्मिक पदाधिकारी (APO-2) अरुण कुमार मंडल को कथित तौर पर ₹50 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद अधिकारी को हिरासत में लेकर कई घंटों तक पूछताछ की गई। इसके साथ ही उनके सरकारी आवास की तलाशी में एक गैर-लाइसेंसी पिस्टल, दो मैगजीन और नौ कारतूस मिलने का भी मामला सामने आया, जिसके बाद स्थानीय थाना में आर्म्स एक्ट के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज की गई।

यह कार्रवाई रेलवे में ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े कथित रिश्वतखोरी मामले में की गई, जिसकी शिकायत लगभग 45 दिन पहले सीबीआई को मिली थी।

ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप

जानकारी के अनुसार, सीबीआई की कार्रवाई डीलिंग क्लर्क अमृत राज की शिकायत के आधार पर की गई।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सहायक कार्मिक पदाधिकारी (APO-2) अरुण कुमार मंडल ने ट्रांसफर और पोस्टिंग के बदले ₹1 लाख की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले का सत्यापन किया और फिर ट्रैप की योजना बनाई।

कार्रवाई के दौरान अधिकारी को कथित तौर पर ₹50 हजार की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया।

CBI की टीम ने घंटों की पूछताछ के बाद किया गिरफ्तार

सीबीआई की नौ सदस्यीय टीम गुरुवार दोपहर डीआरएम कार्यालय पहुंची।

टीम ने पहले अरुण कुमार मंडल से पूछताछ की। शिकायतकर्ता अमृत राज से भी बयान लिया गया। बाद में दोनों को समस्तीपुर स्थित ललित कला केंद्र के अधिकारी क्लब ले जाया गया, जहां बंद कमरे में कई घंटे तक पूछताछ चली।

पूछताछ पूरी होने के बाद सीबीआई ने अरुण कुमार मंडल को गिरफ्तार कर लिया, जबकि शिकायतकर्ता को पूछताछ के बाद जाने की अनुमति दे दी गई।

रात करीब साढ़े नौ बजे सीबीआई की टीम आरोपी अधिकारी को अपने साथ पटना लेकर रवाना हो गई।

सरकारी आवास से हथियार और कारतूस मिलने का दावा

कार्रवाई के दौरान सीबीआई ने आरोपी अधिकारी के सरकारी आवास की भी तलाशी ली।

तलाशी के दौरान एक गैर-लाइसेंसी पिस्टल, दो मैगजीन और नौ कारतूस मिलने का दावा किया गया। इसके बाद नगर थाना पुलिस को इसकी सूचना दी गई।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हथियार तथा कारतूस को जब्त कर लिया। सीबीआई के निरीक्षक सुनील कुमार सिंह कुशवाहा के आवेदन पर नगर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

परिजनों से भी की गई पूछताछ

तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने अरुण कुमार मंडल की पत्नी और बेटी से भी पूछताछ की।

दोनों को दस्तावेजी प्रक्रिया के लिए कुछ समय के लिए अधिकारी क्लब ले जाया गया। आवश्यक पूछताछ और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।

जांच एजेंसी फिलहाल जब्त दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

दस्तावेज भी जांच के दायरे में

सूत्रों के अनुसार, आवास की तलाशी के दौरान ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े कुछ दस्तावेज भी जांच एजेंसी के हाथ लगे हैं।

सीबीआई अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित रिश्वतखोरी का मामला किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है या यह एक अलग घटना है। हालांकि इस संबंध में एजेंसी की ओर से अभी कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

कौन हैं अरुण कुमार मंडल?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अरुण कुमार मंडल का करीब पांच वर्ष पहले सहायक कार्मिक पदाधिकारी (APO-2) के पद पर पदोन्नति हुई थी।

इससे पहले वे रेलवे के वाणिज्य विभाग में सीओएस के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि वे इसी वर्ष दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

फिलहाल उनके खिलाफ रिश्वतखोरी और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों की जांच अलग-अलग स्तर पर जारी है।

जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। सीबीआई रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच कर रही है, जबकि अवैध हथियार बरामद होने के मामले में स्थानीय पुलिस कानूनी कार्रवाई कर रही है।

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में और कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं तथा क्या अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है।

मुख्य बातें 

  • समस्तीपुर डीआरएम कार्यालय में CBI ने छापेमारी की।
  • APO-2 अरुण कुमार मंडल को कथित तौर पर ₹50 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
  • ट्रांसफर-पोस्टिंग के बदले ₹1 लाख मांगने की शिकायत पर कार्रवाई हुई।
  • सरकारी आवास से गैर-लाइसेंसी पिस्टल, दो मैगजीन और नौ कारतूस बरामद होने का दावा।
  • आर्म्स एक्ट के तहत नगर थाना में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई।
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